FRAUD

अंबिकापुर। ATM में धोखाधड़ी करने वाले शातिर अब ग्राहकों की बजाय बैंकों को ही चूना लगाने लगे हैं। ऐसे ही ATM शटर टेम्परिंग कर धोखाधड़ी करने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह को पकड़ने में पुलिस को सफलता मिली है। सरगुजा पुलिस ने उत्तर प्रदेश के जालौन निवासी तीन शातिर युवकों को गिरफ्तार किया है।

मामले का ऐसे हुआ खुलासा

दरअसल अंबिकापुर के स्टेट बैंक के कैश आफिसर गौतम दास ने 28 नवम्बर को बैंक के एटीम मशीन की शटर टेम्परिंग कर धोखाधड़ी कर 21 ट्रांजेक्शन एवं 4 दिसंबर को 25 ट्रांजेक्शन कर लगभग 2 लाख 10 हजार नकदी निकाल कर बैंक क्लेम करने के संबंध में शिकायत की, तब पता चला कि शहर में नए तरीके से ATM से रूपये निकाले जा रहे हैं। इस मामले में थाना कोतवाली अम्बिकापुर में धारा 420, 120 बी का अपराध कायम कर विवेचना शुरू की गई।

नाकेबंदी कर शुरू की गई खोजबीन

थाना प्रभारी कोतवाली उपनिरीक्षक रुपेश नारंग एवं पुलिस टीम द्वारा आरोपियों के धरपकड़ हेतु जिले के सभी निकासी स्थल की नाकेबंदी कर सभी संभावित स्थल पर छापेमारी की गई। इस दौरान बस स्टैंड एवं आस पास के होटल लॉज चेक करने पर एक होटल में 03 संदिग्धों के मिलने पर उनके आने और रुकने का कारण पुलिस टीम द्वारा पूछा गया, मगर गोलमोल जवाब दिए जाने पर युवकों की तलाशी ली गई, और मामला खुल गया।

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भरी मात्रा में मिले ATM और नगद रकम

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 120 नग एटीम, 04 नग मोबाइल, एवं 1,20,000 नगद बरामद किया। आरोपियों ने बताया कि वे जालौन उत्तरप्रदेश से सतना और सतना से अम्बिकापुर 27 नवम्बर को स्विफ्ट कार से आये हैं। इन्होंने बस स्टैंड के पास स्थित होटल में रूककर अगले दिन 28 नवम्बर को स्टेट बैंक के एटीएम से 21 ट्रांजेक्शन और 4 दिसंबर को 25 ट्रांजेक्शन कर लगभग दो लाख 10 हजार रूपये एटीएम शटर टेम्परिंग कर निकाला है। आरोपियों के पास से नकद 1 लाख 20 हजार रुपए बरामद किया गया हैं। एटीएम मशीन की शटर टेम्परिंग कर धोखाधड़ी करने के आरोप में आरोपियों के विरुद्ध अपराध का सबूत पाए जाने से गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।

जानिए कितने तीन स्टेप में करते हैं यह ठगी…

– फर्स्ट सटेप

ठगी के इस नए पैटर्न के बारे में साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि सबसे पहले ठग बैंक में फर्जी नाम-पते पर कुछ लोगों के खाते खुलवाते हैं और इनके ATM कार्ड अपने पास रखते हैं। इसके बाद ठग ATM बूथ पर पहुंचकर एक ATM कार्ड मशीन में कार्ड लगाते हैं। साथ ही कार्ड की कैश लिमिट के हिसाब से कैश निकालने की प्रोसेस करते हैं। जैसे मान लिया जाए कि 10 हजार रुपए निकालने के लिए ठग ने पूरी प्रोसेस की। जब रूपए निकलने वाले होते है तो यह ATM की कैश ट्रे के शटर पर पिन या चाबी लगाकर शटर को बंद कर देते हैं।

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– सेकंड स्टेप

जब कैश आता है तो कैश ट्रे का शटर बंद होने से बाहर नहीं निकलता। इससे तीन बार शटर से टकराने के बाद वहीं ट्रे में अंदर पड़ा रहता है। बैंक के सिस्टम में इसके लिए यहां 20 सेकंड का समय रहता है। 20 सेकंड बाद कैश वापस मशीन में चला जाता है। पर ठग कैश वापस होने से पहले ही निकाली गई रकम से 80 फीसदी रकम निकाल लेते हैं। 20 फीसदी राशि ट्रे में छोड़ देते हैं। जो 20 सेकंड बाद वापस हो जाती है।

– थर्ड स्टेप

रकम वापस होने के बाद बैंक के रिकॉर्ड में ट्रांजेक्शन फेल बताया जाता है, जबकि कैश चोरी हो गया है। ऐसे में कैश चोरी की घटना आसानी से पकड़ में नहीं आती। यह ऑडिट के समय पकड़ में आती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

ठग हमेशा ठगी का पैटर्न बदलते रहते हैं। जब तक लोग एक तरीके को समझते हैं तो वह दूसरे तरीके से वारदात शुरू कर देते हैं। जब उस स्टाइल को ट्रैक कर पाते हैं तो वह नया पैटर्न तलाश लेते हैं। इस तरह की ठगी से बचने के लिए अलर्ट रहकर ही बचा जा सकता है। जैसे अपने कोई भी दस्तावेज किसी को नहीं दें। इसका उपयोग फेक अकाउंट खोलने, सिम कार्ड लेने में हो सकता है। साथ ही अपनी कोई भी पर्सनल डिटेल किसी से शेयर न करें। सतर्कता ही बचाव है।

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