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Bilaspur: गेस्ट लेक्चरर को देना पड़ेगा मातृत्व अवकाश का वेतन, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नियमित-अनियमित का भेद खत्म

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तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Significant High Court Ruling: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं होने के आधार पर किसी महिला गेस्ट लेक्चरर को मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो इस लाभ को केवल नियमित महिला कर्मचारियों तक सीमित करता हो।
  • जस्टिस बिभु दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने राज्य के उच्च शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता के बकाया वेतन के दावे पर नियमानुसार 3 महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

Significant High Court Ruling: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं होने के आधार पर किसी महिला गेस्ट लेक्चरर को मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन देने से इनकार नहीं किया जा सकता। मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो इस लाभ को केवल नियमित महिला कर्मचारियों तक सीमित करता हो।

जस्टिस बिभु दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने राज्य के उच्च शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता के बकाया वेतन के दावे पर नियमानुसार 3 महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता पुष्पा जायसवाल कोंडागांव के शासकीय गुंडाधुर पीजी कॉलेज में राजनीति विज्ञान की गेस्ट लेक्चरर हैं। उन्होंने 16 अगस्त 2024 से कॉलेज में काम करना शुरू किया था। मातृत्व अवकाश के बाद वह 19 अगस्त 2026 को दोबारा ड्यूटी पर लौटीं।

अवकाश की अवधि का वेतन पाने के लिए उन्होंने 29 मई और 5 अगस्त 2026 को अधिकारियों को आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट में दोनों पक्षों की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 5 के तहत उन्हें मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन पाने का पूरा अधिकार है।

वहीं, राज्य सरकार ने दलील दी कि याचिकाकर्ता नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए वह इस अधिनियम के तहत मातृत्व लाभ का दावा नहीं कर सकतीं।

हाईकोर्ट ने सरकार की दलील ठुकराई

हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो नियमित महिला कर्मचारियों को ही इस लाभ का हकदार मानता हो और कैजुअल, दैनिक वेतन या गेस्ट आधार पर काम करने वाली महिलाओं को इससे बाहर रखता हो।

कोर्ट ने कहा कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में किसी महिला से कठिन श्रम कराना उसके स्वास्थ्य और गर्भस्थ शिशु के लिए नुकसानदेह हो सकता है। मातृत्व अवकाश देने के पीछे कानून का उद्देश्य ही महिला को इस तरह के नुकसान से बचाना है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के डॉ. कविता यादव बनाम सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय मामले में 2024 में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि कानून की धारा 5(2) की शर्तें पूरी होने पर मातृत्व लाभ का अधिकार बनता है और रोजगार की अवधि समाप्त होने के बाद भी यह लाभ लागू हो सकता है।

इसके अलावा दिल्ली नगर निगम बनाम महिला कर्मचारी मस्टर रोल मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें दैनिक वेतन पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ देने की व्यवस्था को लागू माना गया था।

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि राज्य सरकार ने इस बात से इनकार नहीं किया कि याचिकाकर्ता नियमित लेक्चरर के समान काम करती हैं। ऐसे में केवल गेस्ट लेक्चरर होने के आधार पर उन्हें मातृत्व लाभ से वंचित करना उचित नहीं है। जब मातृत्व अवकाश स्वीकृत किया गया था, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे उस अवधि का वेतन जारी करें।

FAQ : अक्सर पूछे वाले सवाल

Q1. हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि गेस्ट लेक्चरर को मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन देना होगा, केवल नियमित कर्मचारी नहीं होने के आधार पर मना नहीं किया जा सकता। मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 सभी महिला कर्मचारियों पर लागू है।

Q2. मामला किसका है?
कोंडागांव के शासकीय गुंडाधुर पीजी कॉलेज की राजनीति विज्ञान की गेस्ट लेक्चरर पुष्पा जायसवाल ने याचिका लगाई थी। उन्होंने 16 अगस्त 2024 से काम शुरू किया और मातृत्व अवकाश के बाद 19 अगस्त 2026 को लौटीं, लेकिन अवकाश का वेतन नहीं मिला।

Q3. सरकार की दलील क्या थी और कोर्ट ने क्यों खारिज की?
सरकार ने कहा गेस्ट लेक्चरर नियमित नहीं है इसलिए मातृत्व लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं जो कैजुअल, दैनिक वेतन या गेस्ट महिला को बाहर रखे, और याचिकाकर्ता नियमित लेक्चरर जैसा ही काम करती हैं।

Q4. कोर्ट ने किन सुप्रीम कोर्ट फैसलों का हवाला दिया?
डॉ. कविता यादव बनाम स्वास्थ्य मंत्रालय 2024 और दिल्ली नगर निगम बनाम महिला कर्मचारी मस्टर रोल मामला, जिसमें दैनिक वेतन वाली महिलाओं को भी मातृत्व लाभ का हकदार माना गया था।

Q5. अब क्या होगा?
हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग को आदेश की प्रति मिलने के 3 महीने के भीतर याचिकाकर्ता के बकाया वेतन पर नियमानुसार निर्णय लेने और उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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