धरमजयगढ़। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ इलाके में जिस भूभाग पर भारतमाला प्रोजेक्ट की सड़क प्रस्तावित है, वहां बड़ी संख्या में किसानों ने पोल्ट्री फार्म शेड का निर्माण कर लिया था। शिकायतों के बाद आज प्रशासन ने सभी शेड पर बुलडोजर चलवा दिया। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने इससे पूर्व नोटिस जारी किया था, जिसके खिलाफ कुछ ग्रामीण हाई कोर्ट चले गए। इस मामले में सुनवाई होती, इससे पहले ही प्रशासन ने यह कार्रवाई कर दी, जिससे गांव में तनाव फैल गया।

रायगढ़ जिले में कोयला खदान, प्लांट और सड़कों के लिए जिन जमीनों को चिन्हित किया गया है, उनके मालिकों और दलालों ने ज्यादा मुआवजा पाने के फेर में अफसरों से मिलीभगत करके अस्थाई निर्माण करा लिया था। कई इलाकों में लोगों ने करोड़ों रुपयों का मुआवजा भी हासिल कर लिया, मगर रायपुर संभाग में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रही सड़क का मुआवजा घोटाला जैसे ही उजागर हुआ, मामले की जांच शुरू हो गई और पूरे प्रदेश में इस तरह की गड़बड़ी पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए।

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अधिसूचना से पहले चला खेल

दरअसल धरमजयगढ़ इलाके से होकर गुजरने वाली भारतमाला परियोजना की सड़क को एक प्लांट के चलते कुछ डाइवर्ट करना पड़ा। इसके लिए धरमजयगढ़ के मेडरमार और बायसी कॉलोनी के बीच का भूभाग चिन्हित किया गया। इसके लिए जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना प्रकाशित करने की प्रक्रिया चल रही थी। चूंकि अधिसूचना के बाद से निर्माण कार्य और जमीनों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, इसलिये जमीन मालिकों और दलालों के लिए यह अच्छा अवसर था। मौका देखकर यहां प्रस्तावित सड़क वाले भूभाग में बमुश्किल 15 दिनों के भीतर सौ से भी अधिक शेड खड़े कर दिया गया। यहां केवल शेड बनाया गया, ताकि सर्वे के दौरान उनके निर्माण को पोल्ट्री फार्म के रूप में चिन्हित कर लिया जाये, और उन्हें इसके एवज में लंबा-चौड़ा मुआवजा मिल सके।

प्रशासन ने दिखाई सक्रियता

रायगढ़ जिले के लारा, धरमजयगढ़ और तमनार इलाके में इससे पहले भी बड़े पैमाने पर मुआवजा घोटाला उजागर हो चुका है। वहीं भारतमाला प्रोजेक्ट में एक और घोटाले की तैयारी चल रही थी, जिसकी जानकारी हाल ही में पदस्थ SDM नवीन भगत को लग गयी। यह मामला मीडिया में भी सुर्खियां बना। इसे देखते हुए उच्चाधिकारियों से मिले दिशानिर्देश के बाद SDM ने किसानों को शेड हटाने का नोटिस जारी कर दिया था।

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स्टे लेने के फेर में हाई कोर्ट गए दलाल

दरअसल भारतमाला प्रोजेक्ट से प्रभावित अधिकांश किसान सक्षम नहीं हैं, जिसका फायदा दलालनुमा लोग उठा रहे हैं। इनके द्वारा किसानों से एग्रीमेंट करके उनकी जमीनों पर शेड का निर्माण कर दिया गया, ताकि मुआवजा मिलने पर उन्हें भी इसका हिस्सा मिल सके। प्रशासन द्वारा 13 अगस्त को जारी नोटिस में साफ कहा गया था कि 28 अगस्त तक स्वयं शेड हटा लें, अन्यथा प्रशासन कार्रवाई करेगा।

जब प्रशासन ने नोटिस जारी किया तब ऐसे ही दलाल स्टे के लिए किसानों को लेकर हाईकोर्ट चले गए। हालांकि कोर्ट में कुछ सुनवाई होती, इससे पहले ही प्रशासन की टीम आज सुबह बड़ी संख्या में बुलडोजर लेकर पहुंची और शेड को ढहाना शुरू कर दिया। यहां एक-एक करके सभी शेड जमींदोज कर दिए गए।

इस कार्रवाई से प्रभावित अनेक किसानों का कहना है कि अपनी जमीन पर वे मुर्गी और बकरी पालन का काम करते थे और इससे उनकी रोजी-रोटी चल रही थी। वे प्रशासन की इस कार्यवाही के खिलाफ कोर्ट जायेंगे। वही प्रशासन अपनी कार्यवाही को नियमानुसार बता रहा है। बिना अनुमति के मुआवजा पाने के फेर में इस तरह केवल शेड का निर्माण कर लिया गया, जिसे गलत मानते हुए प्रशासन ने यह कार्यवाही की है।

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बता दें कि रायगढ़ जिले में इस तरह की कार्यवाही पहली बार की गई है। इससे पूर्व राजस्व विभाग और सर्वे टीम के अफसरों की मिलीभगत से जमीन के अधिग्रहण के बाद भी लोगों ने बड़ी संख्या में मकानों और शेड का निर्माण करा लिया और इसके एवज में करोड़ों रुपयों का मुआवजा हासिल कर लिया। इनमें से कुछ की जांच भी चल रही है। ताजा मामले में दलालों की चल नहीं सकी और इनके ज्यादा मुआवजा पाने के मनसूबे अधूरे रह गए हैं।