IAS Jaiprakash Maurya EOW Chargesheet: छत्तीसगढ़ के कथित कोल लेवी घोटाले में EOW ने 5 अक्टूबर को विशेष न्यायालय, रायपुर में करीब 9500 पन्नों का छठा पूरक चालान पेश किया है। इसमें 12 आरोपियों के नाम हैं। इनमें तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म IAS अधिकारी जयप्रकाश मौर्य भी शामिल हैं।
EOW के अनुसार, जांच में मौर्य की भूमिका कोयला परिवहन की व्यवस्था से लेकर आयरन पैलेट परिवहन में कथित वसूली तक सामने आई है।
कोयले के बाद पैलेट परिवहन से भी वसूली का आरोप
जांच आगे बढ़ने के साथ EOW ने कथित वसूली का दायरा सिर्फ कोयला कारोबार तक सीमित नहीं बताया है। पूरक चालान में लौह अयस्क और आयरन पैलेट के परिवहन से ₹100 प्रति टन की कथित वसूली का उल्लेख है। चालान के मुताबिक, 14 दिसंबर 2021 को लौह अयस्क और पैलेट परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। 5 जनवरी 2022 के आदेश के बाद सड़क और रेल मार्ग से परिवहन के लिए यह व्यवस्था लागू हुई। EOW का आरोप है कि इसी दौरान तत्कालीन संचालक जयप्रकाश मौर्य ने पैलेट उद्योगपतियों की बैठक लेकर सूर्यकांत तिवारी या उसके लोगों को ₹100 प्रति टन देने के निर्देश दिए। जांच एजेंसी के मुताबिक, जब्त डायरियों में भी इससे संबंधित प्रविष्टियां मिली हैं।
मौर्य से जुड़ी डायरियों में करीब ₹1 करोड़ का जिक्र
पूरक चालान में जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है। EOW के अनुसार, इन प्रविष्टियों में कुल करीब ₹1 करोड़ दर्ज है। जांच एजेंसी का कहना है कि विवेचना के दौरान सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग से जुड़े मामलों में उसके संपर्क में रहने और कथित अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने से संबंधित तथ्य सामने आए।
ई-परमिट की व्यवस्था में बदलाव भी जांच के दायरे में
EOW की जांच में कोयला परिवहन के लिए ₹25 प्रति टन की कथित अवैध वसूली की व्यवस्था का भी उल्लेख है। जांच एजेंसी के मुताबिक, 15 जुलाई 2020 के आदेश के बाद ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी की मंजूरी जरूरी कर दी गई थी। EOW का आरोप है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल कथित अवैध वसूली के लिए किया गया और रकम मिलने के बाद ही परिवहन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी। जांच में तत्कालीन खनिज अधिकारी अनुराग दीवान के जब्त मोबाइल से 15 जुलाई 2020 के आदेश से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात भी चालान में कही गई है। EOW के मुताबिक, इन साक्ष्यों के आधार पर आदेश जारी होने की प्रक्रिया की जांच की गई।
9500 पन्नों के चालान में 12 आरोपी
EOW ने इस मामले में कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें रामगोपाल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव राय, जयप्रकाश मौर्य, पियूष कुमार साहू, जोगेंद्र सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा शामिल हैं। जांच एजेंसी ने जब्त डायरियों, व्हाट्सऐप चैट, बैंक लेन-देन, संपत्ति दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विवरण चालान में शामिल किया है। EOW के मुताबिक कथित तौर पर वसूली गई रकम को रायपुर लाकर उसका हिसाब रखने, वितरण करने और राजनीतिक व व्यक्तिगत कामों के साथ जमीन, वाशरी और दूसरी संपत्तियों में निवेश से जुड़े तथ्य भी जांच में सामने आए हैं।
डायरी में ‘भवन’ और ‘C PARTY’ के नाम से ₹104.20 करोड़
चालान में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से जुड़ी डायरी प्रविष्टियों का भी उल्लेख है। EOW के अनुसार, ‘भवन’ और ‘C PARTY’ नाम से दर्ज 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ का जिक्र है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम राजीव भवन पहुंचाई गई और देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से रामगोपाल अग्रवाल ने पार्टी के लिए प्राप्त की। इस मामले में संबंधित पक्षों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होना है।
चुनावी खर्च से जुड़े लेन-देन का भी उल्लेख
EOW ने भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव से जुड़ी 11 डायरी प्रविष्टियों में करीब ₹3 करोड़ दर्ज होने की बात कही है। जांच एजेंसी के अनुसार इसमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। इसी तरह विनोद तिवारी और तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से जुड़ी रकम और उसके कथित इस्तेमाल का विवरण भी चालान में शामिल किया गया है। राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में करीब ₹49.50 लाख दर्ज होने की बात कही गई है।
2022 में मौर्य ने खबरों को बताया था गलत और भ्रामक
2022 में छत्तीसगढ़ में कथित घोटालों को लेकर जांच और छापेमारी के दौरान जयप्रकाश मौर्य का एक संदेश भी सामने आया था। इसमें उन्होंने कुछ वेब पोर्टलों पर उन्हें और उनकी पत्नी रानू साहू को बदनाम करने के लिए गलत और भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने लोगों से केवल तथ्यात्मक खबरों पर भरोसा करने की अपील की थी। उस समय मौर्य ने खुद को सरकारी आवास पर शांतिपूर्वक रहने और अगले दिन कार्यालय ज्वाइन करने की बात कही थी।
कोर्ट के फैसले पर टिका है अंतिम निष्कर्ष
EOW की ताजा कार्रवाई में जयप्रकाश मौर्य समेत 12 लोगों के खिलाफ करीब 9500 पन्नों का पूरक चालान पेश किया गया है। जांच एजेंसी ने मौर्य से जुड़ी कथित नकद प्रविष्टियों, खनिज विभाग की प्रक्रियाओं और आयरन पैलेट से कथित ₹100 प्रति टन वसूली से संबंधित तथ्यों को चालान का हिस्सा बनाया है। हालांकि, ये सभी जांच एजेंसी के आरोप और चालान में दर्ज दावे हैं। मामले में आरोपियों का पक्ष और अदालत में होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। कौन दोषी है और कौन निर्दोष, इसका अंतिम फैसला न्यायालय ही करेगा।



