Javelin Missile: भारत अमेरिकी जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। इस प्रस्तावित सौदे से भारतीय सशस्त्र बलों की दुश्मन के टैंकों और अन्य बख्तरबंद वाहनों से निपटने की क्षमता मजबूत हो सकती है।
जैवलिन को युद्ध के मैदान में इस्तेमाल के लिए परखा जा चुका है और इसकी दागो और भूल जाओ क्षमता इसे खास बनाती है। यह मिसाइल टैंकों पर टॉप-अटैक करने में भी सक्षम है। भारत ऐसे समय में इसकी खरीद पर आगे बढ़ रहा है, जब नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
जैवलिन मिसाइल सिस्टम क्यों है खास?
जैवलिन एक मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसे अमेरिकी रक्षा कंपनियों लॉकहीड मार्टिन और आरटीएक्स ने विकसित किया है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि पैदल सैनिक बिना किसी बड़े एंटी-टैंक प्लेटफॉर्म पर निर्भर हुए बख्तरबंद वाहनों को निशाना बना सकें। इसकी सबसे अहम खूबियों में इसकी दागो और भूल जाओ क्षमता शामिल है। लक्ष्य लॉक होने और मिसाइल लॉन्च होने के बाद ऑपरेटर को उसे लगातार गाइड करने की जरूरत नहीं होती। इससे सैनिक मिसाइल दागने के बाद तुरंत अपनी स्थिति बदल सकते हैं। जैवलिन टैंक पर ऊपर से हमला करने में भी सक्षम है। इसे टॉप-अटैक क्षमता कहा जाता है। इसमें मिसाइल बख्तरबंद वाहन के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाती है, जो आमतौर पर उसकी अपेक्षाकृत कमजोर जगह होती है। कुछ लक्ष्यों के खिलाफ इसे डायरेक्ट-अटैक मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सिस्टम इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर का इस्तेमाल करता है। इसे युद्ध के मैदान की अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है।
यूक्रेन के युद्ध में हो चुका है इस्तेमाल
जैवलिन का विभिन्न युद्धों में इस्तेमाल हुआ है। यूक्रेन में इसके इस्तेमाल ने आधुनिक युद्ध में पोर्टेबल एंटी-टैंक हथियारों की भूमिका को भी सामने रखा है। भारत के लिए जैवलिन का संभावित अधिग्रहण मौजूदा एंटी-टैंक हथियारों के साथ एक अतिरिक्त क्षमता जोड़ सकता है। खास तौर पर मोबाइल इन्फैंट्री यूनिट्स के लिए ऐसा हथियार अहम हो सकता है, जिन्हें बख्तरबंद खतरों के खिलाफ तेजी से प्रतिक्रिया देनी पड़ती है।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को भी मिलेगा बढ़ावा
जैवलिन की प्रस्तावित खरीद भारत और अमेरिका के बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच सामने आई है। दोनों देश रक्षा और रणनीतिक क्षेत्र में सहयोग को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि, प्रस्तावित खरीद के तहत कितनी मिसाइलें ली जाएंगी और सौदे की कीमत कितनी होगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यह सौदा हुआ तो भारत को एक मोबाइल और सटीक एंटी-आर्मर क्षमता मिल सकती है। साथ ही इससे भारत-अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को भी और मजबूती मिलने की संभावना है।


