Jhiram Ghati Naxal attack Case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में आज, 16 सितंबर 2026 को सजा का ऐलान होना है। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 5 सितंबर को मुकदमे का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अब अदालत इन दोषियों को कितनी सजा दी जाएगी, इस पर फैसला सुनाएगी।
सजा सुनाए जाने को लेकर जगदलपुर स्थित अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। सभी 10 दोषी फिलहाल जगदलपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं। अदालत के आज के फैसले पर पीड़ित परिवारों, राजनीतिक दलों और पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
25 मई 2013 को बस्तर की दरभा स्थित झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल समेत कई कांग्रेस नेता, सुरक्षा बलों के जवान और अन्य लोग मारे गए थे।
11 आरोपी थे, ट्रायल के दौरान एक की मौत
इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी। मुकदमे की कार्यवाही के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। NIA ने वर्ष 2015 में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
5 सितंबर को सभी 10 आरोपी दोषी करार
विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने 5 सितंबर को मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। रिपोर्टों के अनुसार दोषियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं।
सजा में उम्रकैद से मृत्युदंड तक का प्रावधान
मामले में जिन गंभीर धाराओं के तहत दोषसिद्धि हुई है, उनमें सजा के तौर पर आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि अंतिम सजा क्या होगी, यह अदालत आज दोनों पक्षों की दलीलों और मामले में लागू कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए तय करेगी।
झीरम हमले की बड़ी साजिश पर बहस जारी
दोषसिद्धि के बावजूद झीरम हमले की कथित व्यापक साजिश को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस के नेताओं की ओर से लंबे समय से कहा जाता रहा है कि हमले के पीछे बड़ी साजिश की जांच होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी NIA की जांच और कथित साजिश को लेकर सवाल उठाए हैं। ये राजनीतिक दावे हैं और मौजूदा दोषसिद्धि का दायरा अदालत में मुकदमे का सामना करने वाले 10 आरोपियों तक है।
आज के फैसले के बाद आगे क्या होगा?
16 सितंबर का फैसला झीरम घाटी मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। सजा घोषित होने के बाद दोषियों के पास कानून के तहत ऊपरी अदालत में अपील का रास्ता मौजूद रहेगा। ऐसे में आज की सुनवाई के बाद भी मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहने की संभावना है। झीरम हमले से जुड़े व्यापक सवालों पर भी राजनीतिक और कानूनी बहस बनी रह सकती है।



