रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय ने रायपुर स्थित कंसीव रिसर्च एण्ड सेंटर (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया। यह समझौता आईवीएफ प्रयोगशाला सेवाओं, सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) बैंक प्रक्रियाओं, क्रायोस्टोरेज प्रौद्योगिकियों, छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, इंटर्नशिप और अनुप्रयुक्त अनुसंधान पहलों में शैक्षणिक-औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

इस MoU पर औपचारिक रूप से कलिंगा विश्वविद्यालय परिसर में कुलसचिव डॉ. संदीप गांधी और कंसीव रिसर्च एण्ड सेंटर (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर और चीफ़ एम्ब्रियोलॉजिस्ट श्री प्रीतम चटर्जी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर बायोटेक्नोलॉजी विभाग की प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा दुबे, बायोटेक्नोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर श्री संग्राम केशरी सामल और कंसीव रिसर्च एण्ड सेंटर (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड की सुश्री सृष्टि द्विवेदी भी उपस्थित थीं।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं: आईवीएफ प्रयोगशाला प्रोटोकॉल, एआरटी बैंक संचालन, भ्रूण संस्कृति तकनीकों और क्रायोस्टोरेज प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव; प्रजनन प्रयोगशालाओं में आईसीएसआई, विट्रीफिकेशन, भ्रूण बायोप्सी तथा गुणवत्ता नियंत्रण पर तकनीकी प्रशिक्षण सत्र; प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी, गैमेट/भ्रूण क्रायोप्रिजर्वेशन तथा प्रजनन संरक्षण प्रौद्योगिकियों की खोज करने वाले संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं; तथा विश्वविद्यालय फैकल्टी और औद्योगिक भ्रूणविज्ञानियों के बीच ज्ञान साझाकरण।
कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संदीप गांधी ने कहा यह समझौता ज्ञापन हमारे जैव प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम में वास्तविक आईवीएफ प्रयोगशाला विशेषज्ञता को एकीकृत करने का एक ऐतिहासिक अवसर है।

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हमारे छात्रों को छत्तीसगढ़ की सबसे उन्नत प्रजनन अनुसंधान सुविधाओं में से एक में अमूल्य व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। यह समझौता ज्ञापन छात्रों को तकनीकी दक्षता, पेशेवर आत्मविश्वास और उद्योग के प्रति जागरूकता विकसित करने में मदद करेगा। यह साझेदारी कलिंगा विश्वविद्यालय को मध्य भारत में प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी शिक्षा में अग्रणी स्थान पर रखती है।”

कंसीव रिसर्च एंड सेंटर के डायरेक्टर और चीफ़ एम्ब्रियोलॉजिस्ट श्री प्रीतम चटर्जी ने पारस्परिक लाभों पर जोर देते हुए कहा, कलिंगा विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ साझेदारी हमें अगली पीढ़ी के भ्रूणविज्ञानी को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ प्रजनन विज्ञान में अकादमिक अनुसंधान में योगदान करने की अनुमति देती है। छत्तीसगढ़ के प्रजनन क्षेत्र को कुशल पेशेवरों की आवश्यकता है, और यह सहयोग सीधे तौर पर उस आवश्यकता को पूरा करता है।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा दुबे ने पाठ्यक्रम संवर्धन पर प्रकाश डालते हुए कहा, हमारे छात्रों को अब अत्याधुनिक आईवीएफ प्रयोगशाला प्रशिक्षण प्राप्त होगा जो उनकी सैद्धांतिक जैव प्रौद्योगिकी शिक्षा का पूरक होगा। उन्होंने यह भी कहा एआरटी प्रयोगशाला के कार्यप्रवाह, भ्रूण प्रबंधन तकनीकों और क्रायोबायोलॉजी अनुप्रयोगों के व्यावहारिक अनुभव से हमारे छात्रों को बढ़ते प्रजनन सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समझौता ज्ञापन के तहत सहयोगात्मक प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और इंटर्नशिप छात्रों को बेहतर करियर के लिए मदद करेंगे।

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कंसीव रिसर्च एण्ड सेंटर (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड व्यापक आईवीएफ प्रयोगशाला समर्थन में विशेषज्ञता रखता है, जिसमें एआरटी बैंक प्रबंधन, गैमेट एवं भ्रूण क्रायोस्टोरेज, आईवीएफ मीडिया एवं उपभोग्य सामग्री, प्रयोगशाला उपकरण स्थापना तथा भ्रूणविज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। यह सुविधा छत्तीसगढ़ में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियों के लिए अत्याधुनिक अवसंरचना का प्रतिनिधित्व करती है।

नया रायपुर स्थित कलिंगा विश्वविद्यालय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुशासनों में अपनी उद्योग संपर्कों को सतत सशक्त बना रहा है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग स्वास्थ्य सेवा एवं पर्यावरणीय क्षेत्रों से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा अनुसंधान अनुप्रयोगों पर बल देता है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।