टीआरपी डेस्क। बेंजामिन फ्रैंकलिन ने कहा था कि दुनिया में मौत और टैक्स के अलावा कुछ भी निश्चित नहीं है, लेकिन कुछ देशों ने इस कहावत को झुठला दिया है। जहां दुनिया के अधिकांश हिस्सों में कमाई का बड़ा हिस्सा सरकार के पास चला जाता है, वहीं कुछ ऐसे ‘टैक्स हेवन’ देश हैं जहां आपकी निजी आय पर सरकार का कोई हक नहीं होता। इन देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था को इस तरह तैयार किया है कि उन्हें आम नागरिक की जेब से सीधे पैसे निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ती। आइए विस्तार से जानते हैं उन देशों के बारे में जहाँ पर्सनल इनकम टैक्स का कोई अस्तित्व नहीं है।
गल्फ देशों की शानदार व्यवस्था, यहां कमाई पर लगता है जीरो टैक्स
खाड़ी देशों ने अपनी प्राकृतिक संपदा और मजबूत वित्तीय नीतियों के दम पर टैक्स मुक्त व्यवस्था का ढांचा तैयार किया है।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): यहां रहने वालों को अपनी आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता और न ही किसी टैक्स रिपोर्टिंग की औपचारिकता निभानी होती है।
- कतर: व्यक्तिगत आय के साथ-साथ यहां कैपिटल गेन्स और वेल्थ टैक्स से भी पूरी तरह छूट दी गई है।
- ओमान: ओमान भी एक टैक्स-फ्री देश है जहां प्रॉपर्टी और दौलत पर कोई टैक्स नहीं लगता।
- कुवैत: यहां प्रत्यक्ष आय कर पूरी तरह शून्य है, हालांकि निवासियों को कुछ आयात शुल्क जैसे अप्रत्यक्ष कर देने होते हैं।
- बहरीन: यहां 40,000 डॉलर से कम कमाने वालों पर कोई टैक्स नहीं है, लेकिन इससे अधिक आय पर 15 फीसदी का मामूली टैक्स देना होता है।
खूबसूरत आइलैंड और यूरोपीय ठिकाने: जहाँ सुंदरता के साथ मिलती है टैक्स से राहत
सिर्फ खाड़ी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई द्वीपीय राष्ट्र भी अपनी ‘जीरो टैक्स’ पॉलिसी के लिए मशहूर हैं:
- बहामास: नागरिकों को आय, विरासत या उपहारों पर कोई टैक्स नहीं देना होता, हालाँकि सामान और सेवाओं पर वैट (VAT) लागू रहता है।
- मोनाको: यूरोप का यह छोटा सा देश अपनी ‘जीरो इनकम टैक्स’ नीति के लिए दुनियाभर के अमीरों की पहली पसंद है।
- केमैन आइलैंड्स: यहाँ न केवल इनकम टैक्स, बल्कि कॉर्पोरेट और पेरोल टैक्स को भी खत्म कर दिया गया है।
- बरमूडा: यहां पर्सनल इनकम और कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता, हालांकि निवासियों को 5.5 फीसदी का पेरोल टैक्स देना अनिवार्य है।
बिना टैक्स के कैसे चलती हैं सरकारें: आखिर कहाँ से आता है इतना पैसा?
सवाल उठता है कि अगर जनता टैक्स नहीं देती, तो इन देशों में सड़कें, अस्पताल और प्रशासन का खर्च कैसे निकलता है? ग्लोबल रेजिडेंस इंडेक्स के अनुसार, ये देश अपनी आय के लिए तेल और खनिजों के विशाल निर्यात पर निर्भर हैं। इसके अलावा पर्यटन, रियल एस्टेट और सरकारी से होने वाली कमाई इनकी अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ है। सरकारें सीधे टैक्स वसूलने के बजाय बिजनेस रजिस्ट्रेशन, सालाना ऑडिट फीस, रेजिडेंस परमिट, व्हीकल लाइसेंस और रोड टोल जैसी सेवाओं के लिए मोटी फीस लेती हैं। इस तरह ये देश बिना आम आदमी की आय पर बोझ डाले दुनिया की सबसे आधुनिक सुविधाओं वाली अर्थव्यवस्थाओं का संचालन कर रहे हैं।


