Hasdeo Aranya forest elephants vs coal mining excavator NGT notice
Hasdeo Aranya forest elephants vs coal mining excavator NGT notice

Kete Extension challenged at NGT: छत्तीसगढ़ का फेफड़ा कहे जाने वाले हसदेव अरण्य में एक बार फिर कोयला बनाम जंगल की जंग तेज हो गई है। यहां प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को दी गई पर्यावरण मंजूरी (EC) कोनेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में चुनौती दी गई है। सुनवाई के बाद जस्टिस शिवकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर चतुर्वेदी की बेंच ने केंद्र, राज्य सरकार, RVUNL और राजस्थान कोलियरीज लिमिटेड को नोटिस जारी कर दिया है।

यह याचिका बिलासपुर की संस्था ‘नेचर क्लब’ से जुड़े संजीव दत्ता ने दायर की है। अधिवक्ता अग्नेय सेल ने कोर्ट को बताया कि हसदेव अरण्य घने जंगल और जैव विविधता के लिए बेहद अहम है। यह हाथियों समेत कई वन्यजीवों का घर है और हजारों आदिवासियों की आजीविका का सहारा भी।

सबसे बड़ा सवाल – नई खदान की जरूरत ही क्या?

याचिका में कहा गया है कि राजस्थान के बिजली संयंत्रों के लिए मौजूदा परसा ईस्ट और केते बासन (PEKB) खदान से ही पर्याप्त कोयला मिल रहा है। फिर 1760 हेक्टेयर में फैली नई खदान खोलने की जरूरत क्यों? याचिका में कहा गया है कि कोयला खनन से इस पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।

See also  विशेष ग्राम सभा में हसदेव अरण्य में खदान के विरोध का प्रस्ताव पारित, मगर अब इसे अवैध बता रहा है जिला प्रशासन

4.5 लाख पेड़ों का आंकड़ा छिपाया?

याचिकाकर्ता का सबसे गंभीर आरोप EC प्रक्रिया में तथ्य छिपाने का है। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस ब्लॉक में 4.48 लाख पेड़ हैं और 99% जमीन वनभूमि है। दावा है कि 7 लाख पेड़ कटने वाले हैं, लेकिन आवेदन में पेड़ों की संख्या शून्य दिखाई गई। 3 साल से ज्यादा पुराने पर्यावरणीय डेटा का इस्तेमाल किया गया, जबकि नियमों के मुताबिक ताजा डेटा लगना चाहिए था।

इस मुद्दे पर NGT ने सरगुजा DFO को पेड़ों की वास्तविक संख्या पर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

हाथी रिजर्व से सिर्फ 3 KM दूरी

परियोजना क्षेत्र रामगढ़ पहाड़ियों के पास और लेमरू एलीफेंट रिजर्व से महज 3 KM दूर है। याचिका में कहा गया है कि ICFRE और WII ने इस पूरे इलाके को अत्यधिक संवेदनशील बताकर संरक्षण की सिफारिश की थी, लेकिन उन रिपोर्टों को EC के दौरान नजरअंदाज कर दिया गया।

अब 6 अक्टूबर की सुनवाई में तय होगा कि हसदेव में खनन की रफ्तार बढ़ेगी या जंगल की सांसें बची रहेंगी।

See also  छत्तीसगढ़ के दूसरे छोर से भी सैकड़ों आदिवासी पहुंचे राजधानी, हसदेव अरण्य को बचाने की चला रहे हैं मुहिम

FAQ: केते एक्सटेंशन के खिलाफ याचिका

सवाल 1. किस प्रोजेक्ट की EC को चुनौती दी गई है?
जवाब: हसदेव अरण्य में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की पर्यावरणीय मंजूरी (EC) को NGT भोपाल में चुनौती दी गई है।

सवाल 2. याचिकाकर्ता का मुख्य आरोप क्या है?
जवाब: आरोप है कि 4.48 लाख पेड़ों वाले वन क्षेत्र में 7 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, लेकिन EC आवेदन में पेड़ों की संख्या शून्य दिखाई गई और पुराने डेटा का इस्तेमाल किया गया।

सवाल 3. अगली सुनवाई कब है?
जवाब: NGT ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 6 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई तय की है।