कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एसईसीएल (SECL) गेवरा खदान के विस्तार के लिए प्रशासन ने हरदीबाजार इलाके में बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), सरकारी छात्रावास, आंगनबाड़ी और पटवारी कार्यालय को बुलडोजर से ढहा दिया।
अचानक हुई इस कार्रवाई से न सिर्फ इलाके के लोगों में भारी गुस्सा है, बल्कि इलाज कराने पहुंचे मरीजों को भी बिना इलाज के ही मायूस होकर लौटना पड़ा। इस तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है और वे सड़कों पर उतर आए हैं।
मलबे में दबी दवाइयां और दस्तावेज
अस्पताल और अन्य सरकारी भवनों को तोड़े जाने की इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों और कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें स्वास्थ्य केंद्र, पटवारी कार्यालय और आंगनबाड़ी से जरूरी सामान या सरकारी दस्तावेज बाहर निकालने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। कई जरूरी दवाइयां और रिकॉर्ड मलबे के नीचे दब गए।
इलाज के लिए पहुंचे मरीज लौटे
आम दिनों की तरह शनिवार सुूबह मरीज जब अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने वहां मलबे का ढेर देखा। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें इस कार्रवाई की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों और बीजेपी विधायक का प्रदर्शन, SECL दफ्तर पर तालाबंदी
इस बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में शनिवार को कटघोरा से बीजेपी विधायक प्रेमचंद पटेल के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण दीपका स्थित SECL के मुख्य महाप्रबंधक (GM) दफ्तर जा पहुंचे।
गुस्साए ग्रामीणों ने एसईसीएल जीएम ऑफिस के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और ग्रामीणों की पुलिस के साथ तीखी झड़प भी देखने को मिली।
जीएम ऑफिस में हंगामा
हंगामे और तालाबंदी के बीच SECL गेवरा के महाप्रबंधक (GM) अशोक कुमार प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।
जीएम अशोक कुमार ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा जो मांगें उठाई जा रही हैं, वे उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। इस संबंध में उच्च अधिकारियों से चर्चा के बाद ही आगे का कोई निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।



