रायपुर। छत्तीसगढ़ में जेम पोर्टल की आड़ में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है। इस बार सवाल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के अधीन संचालित स्टेट ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट, रायपुर में एयर कंडीशनर (AC) के मेंटेनेंस टेंडर पर उठ रहे हैं।

टीआरपी को उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार संस्थान में लगी डायकिन कंपनी की एक एसी की कीमत बाजार में करीब 78 हजार रुपये है, लेकिन उसी एसी के सिर्फ एक साल के मेंटेनेंस के लिए 81,666 रुपये तय कर दिए गए। यानी जिस कीमत में नया एसी खरीदा जा सकता है, उससे भी ज्यादा राशि उसके रखरखाव पर खर्च की जा रही है।

यही नहीं, संस्थान में लगे 30 एसी के लिए यह ठेका करीब 25 लाख रुपये का दिया गया है। सरकारी दस्तावेज सामने आने के बाद अब पूरे टेंडर की प्रक्रिया और खर्च पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

GeM पोर्टल पर हुआ टेंडर

दस्तावेजों के अनुसार यह टेंडर Government e-Marketplace (GeM) के माध्यम से जारी किया गया। कॉन्ट्रैक्ट 14 मई 2026 को जनरेट हुआ, जबकि सेवा अवधि 17 मई 2026 से 17 मई 2027 तक तय की गई है।

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दस्तावेज में साफ उल्लेख है कि संस्थान में 30 एयर कंडीशनर हैं और प्रत्येक एसी के लिए 81,666 रुपये प्रति वर्ष की दर से भुगतान किया जाएगा। इसी आधार पर कुल अनुबंध राशि करीब 25 लाख रुपये तय हुई।

मेंटेनेंस या नया एसी?

सबसे चौंकाने वाली बात यही है कि जिस एसी की कीमत करीब 78 हजार रुपये बताई जा रही है, उसके मेंटेनेंस पर ही 82 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

आमतौर पर किसी भी एयर कंडीशनर का वार्षिक AMC उसकी खरीद कीमत का एक छोटा हिस्सा होता है। सरकारी विभागों और निजी संस्थानों में भी सामान्य AMC की दरें खरीद मूल्य से काफी कम रहती हैं। ऐसे में खरीद कीमत से अधिक मेंटेनेंस भुगतान कई सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों की मानें तो एसी का वार्षिक मेटेंनेंस हुआ है या नहीं इस पर भी संशय है।

दस्तावेज में क्या लिखा है?

कॉन्ट्रैक्ट में इसे Comprehensive AMC बताया गया है। इसमें चार नियमित सर्विस, ब्रेकडाउन मेंटेनेंस और जरूरत पड़ने पर स्पेयर पार्ट बदलने जैसी सेवाएं शामिल होने का उल्लेख है। लेकिन सवाल यह है कि क्या एसी मेंटेनेंस का खर्च ही नए एसी की कीमत से ज्यादा हो सकता है?

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25 लाख का हिसाब कौन देगा?

30 एसी के लिए करीब 25 लाख रुपये का भुगतान मंजूर किया गया है। यानी औसतन हर महीने लाखों रुपये का सरकारी खर्च सिर्फ एसी के रखरखाव पर किया जाएगा।

अब सवाल यह है कि क्या टेंडर जारी करने से पहले बाजार दरों का अध्ययन किया गया था? क्या विभाग ने किसी तकनीकी समिति से लागत का मूल्यांकन कराया था? और अगर कराया गया तो फिर इतनी ऊंची दरें कैसे तय हो गईं?

उठ रहे ये सवाल

  • जब एक नया एसी करीब 78 हजार रुपये में उपलब्ध है तो उसका सालाना मेंटेनेंस 81,666 रुपये क्यों?
  • क्या टेंडर की शर्तें किसी खास कंपनी या ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गईं?
  • क्या बाजार दरों की तुलना किए बिना करोड़ों के सरकारी खर्च को मंजूरी दे दी गई?

टीआरपी के पास उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार अब यह मामला अब सिर्फ एक AMC टेंडर तक सीमित नहीं रह गया है। करीब 25 लाख रुपये के इस खर्च ने सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसा पहली बार नहीं है जब GeM Portal की आड़ में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। समय-समय पर शासन द्वारा कार्रवाई भी की गई है इसके बाद भी शासकीय विभागों में GeM की आड़ में भ्रष्टाचार का खेल जारी है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।