राजधानी की सेंट्रल जेल में एक और बड़ा हादसा, कैदी ने फांसी लगाकर दी जान

0 चक्कर, मुलाकात, मुंगौड़ी पॉइंट और पेट्रोल पंप में लंबे वक्त से तैनाती

रायपुर। टीआरपी डेस्क
हमारी जेल में सुरंग… ! ये फेमस फ़िल्मी डायलॉग भले ही मज़ाकिया अंदाज़ वाला था, लेकिन रायपुर सेन्ट्रल जेल में पूर्व अधिकारी के चेहते आज भी सुरक्षा में सेंध लगाए बैठे हैं। जेल में तक़रीबन 15 से 25 साल से जमें साहब के इन चेहतों की भर्ती भी रायपुर की है। तब से लेकर अब तक रायपुर से बाहर नहीं भेजे गए है। जेल मैन्यूअल में हर 3 साल में संभागीय स्टार पर प्रहरियों और इनसे ऊपर के पद पर राजयभर की जेल में तबादला का नियम है। लेकिन जेल नियमावली को मुंह चिढ़ाते ऐसे जेल स्टाफ सालों से यहीं जमे बैठे है। जानकारों के मुताबिक इनके वर्षों से रायपुर सेन्ट्रल जेल में ही रहने से सुरक्षा भी दांव पर है। सेन्ट्रल जेल के आला अफसरों से ज्यादा अंदर इनकी चलती है।

इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल में बंद निलंबित एडीजी जीपी सिंह जेल के दूसरे टावर में चढ़ गए। टावर तक पहुंचाने वाले सेल इंचार्ज और ड्यूटी इंचार्ज सहित तीन को बाद में निलंबित कर दिया गया था। जिनके नाम केशव सिंह, मंगल सिंह और फिरतराम यादव है। बताते हैं कि जेल में रहते हुए पंजाब के चुनाव परिणाम टीवी में देखने की इच्छा जीपी सिंह ने जाहिर की थी। दोपहर का समय था बड़े अधिकारी सब इधर-उधर थे। जीपी सिंह को जिस सेल में रखा गया था । उसके बगल में तीन मंजिला टावर है। जहां से प्रहरी जेल की निगरानी करते हैं। ड्यूटी पर तैनात प्रहरी ने बिना उच्चाधिकारियों से पूछे उन्हें दूसरे माले में चढ़ा दिया। टावर के दूसरे माले में जाकर जीपी सिंह ने तकरीबन आधे घंटे टीवी में चुनावी महौल देखा। इसके बाद वह नीचे आ गए। उस दिन जेल के उच्च अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। दूसरे दिन जब पता चला तो तत्काल प्रभाव से तीन को निलंबित कर दिया गया था।

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सुरक्षा में ये है लायकुना

जेल पेट्रोल पंप में करीब 1 करोड़ रूपए से ज्यादा की गड़बड़ियां पाई गई थी। इसमें भी रिटायर्ड हो चुके पूर्व साहब के एक चेहते का काम था। जेल की छोटी और बड़ी चक्कर में ही जमे एक प्रहरी पर कैदियों तक सिगरेट, बीड़ी तम्बाकू ले जाने का काम है। सालों से जेल की मुंगौड़ी सेंटर में ही जमे एक प्रहरी पर बाहर का अंदर सामान लेकर जाने का जिम्मा है। मुलाकाती तैनाती में भी खेल का जिम्मा पहले से ही तय है।

केस – वन
राजेश वर्मा प्रहरी करीब 20 साल से रायपुर में है। एक बार कवर्धा ट्रांसफर हुआ तो साहब की बदौलत चंद रोज़ में लौट आया। मुंगौड़ी सेंटर का जिम्मा क्योंकि खुद को ड्यूटी के लिए अनफिट कहता है। मुंगौड़ी से होने वाली आय और जेल के तबेले का दूध का जिम्मा भी इसी के पास।

केस – टू
डोमन सिंह प्रहरी 15 साल से जेल पेट्रोल पंप का जिम्मा लिए है। इसपर करीब 1 करोड़ रूपये की गड़बड़ी का आरोप भी लगा था। आज भी रायपुर सेन्ट्रल जेल में ही तैनाती है।

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केस – थ्री
टंकेश्वर साहू को रायपुर सेन्ट्रल जेल में करीब 20 साल होने को है। परिजनों की कैदियों से मुलाकात के लिए सबसे चर्चित है। इसी तरह मनत पुरेना 15 साल से छोटी चक्कर और बड़ी चक्कर में ड्यूटी के दौरान कैदियों से समन्वय रख रहा है।

केस – फोर
आरक्षक संवर्ग अखिलेश पटेल, किरण साहू टेकराम वर्मा समेत आधा दर्जन स्टाफ रायपुर सेन्ट्रल जेल में भर्ती से लेकर 15 से 20 साल से यही हैं।

वर्ज़न
कौन कितने वर्षों से पदस्थ है और उसका तबादला शासन स्तर पर निर्णय लिया जाता है।

वाय.एस क्षत्रिय, जेल सुपरिटेंडेंट रायपुर प्रभार

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।