One Demand, One Platform Protest: राजधानी में कर्मचारी आंदोलन ने फिर जोर पकड़ लिया। इंद्रावती भवन के मुख्य गेट के सामने प्रदेश भर से पहुंचे 55 संगठनों ने एक मांग एक मंच के बैनर तले सरकार के खिलाफ सांकेतिक हल्लाबोल किया। इस दौरान आर्थिक शोषण बंद करो के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था- वादे बहुत हुए, अब आदेश चाहिए। उनकी 5 सूत्रीय मांगों में सबसे बड़ा मुद्दा मोदी की गारंटी वाला नियमितीकरण है। इसके साथ ही नगरीय निकाय में पुरानी पेंशन बहाली, स्वास्थ्य विभाग से ठेका प्रथा खत्म करने, MP पैटर्न पर कर्मचारियों-पेंशनरों को 20 लाख तक कैशलेस इलाज और जनवरी 2026 से लंबित महंगाई भत्ता जारी करने की मांग शामिल है।
संगठनों ने दिखाई एकजुटता
मंच से डॉ. डी पी मनहर ने कहा सरकार को अपना वादा याद दिलाना पड़ेगा, वहीं करन सिंह अटेरिया और जयनारायण श्रीवास्तव ने चेतावनी दी कि अनदेखी भारी पड़ेगी। गोपाल साहू, अनिल शुक्ला, महेंद्र सिंह राजपूत, बीजापुर से आईं अंजू गोरला समेत दर्जन भर वक्ताओं ने हुंकार भरी। संचालन विद्याभूषण दुबे ने किया। कर्मचारी संगठनों ने इस तरह एकजुटता दिखते हुए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की।
प्रदर्शन के बाद हुई रणनीति बैठक में बड़ा फैसला हुआ- अगर अक्टूबर तक मांगों पर आदेश नहीं आया तो 30 अक्टूबर को हजारों कर्मचारी सीधे मंत्रालय का घेराव करेंगे।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. प्रदर्शन कहां हुआ?
इंद्रावती भवन गेट के सामने रायपुर में।
Q2. कितने संघ?
एक मांग एक मंच के तहत 55 कर्मचारी संघों के प्रतिनिधि।
Q3. 5 मांगें क्या हैं?
अनियमित को नियमित, नगरीय निकाय में OPS, स्वास्थ्य में ठेका बंद, 20 लाख कैशलेस उपचार MP की तरह, जनवरी 2026 से DA।
Q4. अगला कदम क्या?
मांग पूरी नहीं होने पर 30 अक्टूबर को मंत्रालय घेराव।



