Objection medical education to private hands: नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने चिकित्सा एवं पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को आयुष विश्वविद्यालय के नियंत्रण से मुक्त कर निजी विश्वविद्यालयों को सौंपने की कवायद पर कड़ा एतराज जताया और राज्यपाल को पत्र लिखकर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विगत 26 वर्षों से चिकित्सा, पैरामेडिकल सहित अन्य तकनीकी पाठ्यक्रम आयुष विश्वविद्यालय अधिनियम 2008 एवं तकनीकी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत संचालित हो रहे हैं। उनके मुताबिक वर्तमान में प्रदेश के करीब 5 लाख युवा इन पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद पहले ही चिकित्सा और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को निजी विश्वविद्यालयों को सौंपने के प्रस्ताव पर असहमति जता चुकी है। इसके बावजूद शासन स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाना संदेहास्पद और अनुचित है।
डॉ महंत ने बताया कि आयुष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद पहले ही चिकित्सा और पैरामेडिकल कोर्स निजी विश्वविद्यालयों को सौंपने के प्रस्ताव पर असहमति जता चुकी है, फिर भी शासन स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाना संदेहास्पद और अनुचित है।
महंगा होगा कोर्स, गरीब-ग्रामीण छात्र होंगे बाहर
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पाठ्यक्रमों के निजीकरण से उच्च शिक्षा महंगी होगी और आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण तथा वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थापित व्यवस्था में बदलाव कर द्विस्तरीय प्रणाली लागू करने से चिकित्सा शिक्षा, परीक्षाओं की शुचिता और डिग्री की साख पर सवाल खड़े हो सकते हैं। महंत ने राज्यपाल से इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रक्रिया रोकने तथा वर्तमान व्यवस्था को यथावत बनाए रखने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने राज्यपाल से त्वरित संज्ञान लेकर प्रक्रिया रोकने और वर्तमान व्यवस्था यथावत बनाए रखने के लिए सरकार को निर्देशित करने का अनुरोध किया।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. महंत ने किसे पत्र लिखा?
राज्यपाल को, चिकित्सा-पैरामेडिकल कोर्स प्राइवेट को सौंपने की प्रक्रिया रोकने के लिए।
Q2. कितने छात्र प्रभावित होंगे?
करीब 5 लाख छात्र वर्तमान में आयुष अधिनियम के तहत पढ़ रहे हैं।
Q3. आयुष विश्वविद्यालय का स्टैंड क्या है?
कार्य परिषद पहले ही निजी को सौंपने के प्रस्ताव पर असहमत है।
Q4. विरोध क्यों?
कोर्स महंगा होगा, गरीब-ग्रामीण-वंचित छात्रों के लिए पहुंच मुश्किल, दो स्तरीय प्रणाली से परीक्षा और डिग्री की साख पर सवाल।
Q5. महंत की मांग क्या?
प्रक्रिया पर तत्काल रोक और वर्तमान व्यवस्था यथावत रखी जाए।



