Embezzlement of crores from the company: 2 करोड़ से अधिक के गबन केस में आरोपी चीफ अकाउंटेंट की मां को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। महिला बिलासपुर के सरकंडा की रहने वाली है, जबकि FIR रायपुर के विधानसभा थाने में दर्ज है। इससे पहले 24 जुलाई 2026 को बेटे की नियमित जमानत भी खारिज हो चुकी है।
मामला रायपुर स्थित केमप्लास्ट प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का है। डायरेक्टर अनुराग अग्रवाल ने 22 और 30 जुलाई 2025 को धोखाधड़ी की शिकायत दी। उनकी कंपनी में सागर तिवारी 1 अगस्त 2022 से चीफ अकाउंटेंट था, ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजेक्शन उसी के पास था। आरोप है कि उसने पद का दुरुपयोग कर कंपनी के बैंक खातों से रकम रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर की। शुरू में 1.20 करोड़ बताया गया, ऑडिट में रकम बढ़कर 2,02,48,916 रुपए निकली।
पुलिस जांच में खुला पैटर्न
बैंक स्टेटमेंट से पता चला कि पैसा पहले कुछ थर्ड-पार्टी खातों में भेजा गया, फिर वहां से आरोपी के परिजनों के खातों में ट्रांसफर हुआ। इसके बाद इन खातों से पैसा आरोपी के परिजनों के खातों में ट्रांसफर किया गया। इसी लिंक के आधार पर परिवार की भूमिका जांच में आई और मां को भी आरोपी बनाया गया। उनकी अग्रिम जमानत भी कोर्ट ने खारिज कर दी है।
FAQ: 2.02 करोड़ गबन केस
Q1. कितने का गबन है?
शुरुआत में 1.20 करोड़ की शिकायत, ऑडिट के बाद राशि बढ़कर 2,02,48,916 रुपए सामने आई।
Q2. आरोपी कौन है और कब से कंपनी में था?
आरोपी सागर तिवारी, जो 1 अगस्त 2022 से केमप्लास्ट प्रोडक्ट्स प्रा. लि. रायपुर में चीफ अकाउंटेंट था और ऑनलाइन बैंकिंग उसी के पास थी।
Q3. FIR कहां और कब दर्ज हुई?
रायपुर के विधानसभा थाने में कंपनी डायरेक्टर अनुराग अग्रवाल ने 22 और 30 जुलाई 2025 को शिकायत दर्ज कराई।
Q4. पैसे कैसे ट्रांसफर हुए?
पुलिस और बैंक स्टेटमेंट के अनुसार पहले कंपनी खाते से रकम थर्ड-पार्टी खातों में गई, फिर वहां से परिजनों और परिचितों के खातों में।
Q5. मां की जमानत क्यों खारिज हुई?
महिला सरकंडा बिलासपुर निवासी है, परिजन खातों में रकम जाने के लिंक के चलते हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज कर दी। बेटे की नियमित जमानत भी 24 जुलाई 2026 को खारिज हो चुकी है।



