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रायपुर में GST का बड़ा खेल! मृत व्यक्ति से लेकर इलेक्ट्रिशियन तक के नाम पर फर्म, चायवाले और मजदूर के नाम करोड़ो का लेन-देन

Raipur GST Fraud Case: रायपुर में राज्य जीएसटी विभाग की जांच के बाद कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाने का मामला सामने आया है। विभाग की शिकायत पर तेलीबांधा पुलिस ने मेसर्स अगस्त्य इंटरप्राइजेस के प्रोपराइटर अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच में कई ऐसी फर्मों का […]

GST Fraud Investigation
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Raipur GST Fraud Case: रायपुर में राज्य जीएसटी विभाग की जांच के बाद कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाने का मामला सामने आया है। विभाग की शिकायत पर तेलीबांधा पुलिस ने मेसर्स अगस्त्य इंटरप्राइजेस के प्रोपराइटर अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच में कई ऐसी फर्मों का पता चला, जिनके नाम पर बड़े कारोबार और आईटीसी का दावा किया गया।

जीएसटी विभाग के अनुसार, अमन अग्रवाल से जुड़ी करीब 10 ऐसी फर्में जांच के दायरे में आईं, जो या तो मौके पर संचालित नहीं मिलीं या जिन लोगों के नाम पर पंजीकृत थीं, उन्होंने कारोबार से किसी तरह का संबंध होने से इनकार कर दिया। विभाग ने इन फर्मों के पते पर जाकर भौतिक सत्यापन भी कराया।

मृत व्यक्ति के नाम 2025 में बना किरायानामा

जांच का सबसे चौंकाने वाला मामला गरियाबंद की हुसैनी इंटरप्राइजेस से जुड़ा है। विभाग के मुताबिक, फर्म के किरायानामे में मकान मालिक के तौर पर फूल सिंह का नाम दर्ज था। जांच में पता चला कि फूल सिंह की वर्ष 2010 में ही मौत हो चुकी थी, जबकि किरायानामा 21 मार्च 2025 को तैयार किया गया था।

16.61 करोड़ की खरीद और 2.99 करोड़ की ITC

हुसैनी इंटरप्राइजेस के प्रोपराइटर मोहम्मद इस्लाम ने भी विभाग के सामने कारोबार और बैंक खाते से अनजान होने की बात कही। विभाग के अनुसार, इस फर्म के जरिए अगस्त्य इंटरप्राइजेस को 16.61 करोड़ रुपये की खरीद-बिक्री दिखाई गई और 2.99 करोड़ रुपये की आईटीसी का दावा किया गया।

इलेक्ट्रिशियन के नाम 11.61 करोड़ का कारोबार

यूनिक इंटरप्राइजेस की जांच में भी ऐसा ही मामला सामने आया। विभाग के मुताबिक, इस फर्म के नाम पर 11.61 करोड़ रुपये का कारोबार और 2.08 करोड़ रुपये की आईटीसी दिखाई गई। फर्म के प्रोपराइटर मजहर खान ने बताया कि वह इलेक्ट्रिशियन हैं और इस कारोबार से उनका कोई संबंध नहीं है।

पार्किंग कर्मचारी के नाम 30 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

अंसारी ट्रेडर्स के नाम पर 30.71 करोड़ रुपये का कारोबार और 5.52 करोड़ रुपये की आईटीसी दिखाई गई। विभाग के अनुसार, इसके प्रोपराइटर एफजल अंसारी ने पूछताछ में बताया कि वह पार्किंग में नौकरी करते हैं और अमन अग्रवाल को नहीं जानते। इस बयान के बाद फर्म के कारोबार और दस्तावेजों की भूमिका जांच के घेरे में आ गई।

चाय ठेले वाले के नाम 22 करोड़ का कारोबार

विकास यदु के नाम से दर्ज अगस्त इंटरप्राइजेस में 22.47 करोड़ रुपये का कारोबार और 4.04 करोड़ रुपये की आईटीसी दिखाई गई। विभाग के अनुसार, विकास ने पूछताछ में बताया कि वह पहले चाय का ठेला लगाता था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि उसके नाम पर फर्म कैसे पंजीकृत हुई और कारोबार किसने संचालित किया।

नौकरी करने वाले के नाम करीब 30 करोड़

ललित ट्रेड लिंक के नाम पर 29.72 करोड़ रुपये का कारोबार और 5.17 करोड़ रुपये की आईटीसी दिखाई गई। विभाग के मुताबिक, इसके प्रोपराइटर ललित सोनी ने बताया कि वह पिछले तीन साल से नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में उनके नाम से दर्ज कारोबार और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

दिहाड़ी मजदूर और सफाईकर्मी के नाम भी करोड़ों

विनायक वेंचर्स के नाम पर 17.95 करोड़ रुपये का कारोबार और 1.36 करोड़ रुपये की आईटीसी दिखाई गई। इसके प्रोपराइटर प्रताप सिंह वर्मा ने खुद को दिहाड़ी मजदूर बताया। वहीं महावीर इंटरप्राइजेस के नाम पर 12.67 करोड़ रुपये का कारोबार और 2.27 करोड़ रुपये की आईटीसी दिखाई गई। इसके प्रोपराइटर महेश फकीरा सोनी ने अपने बारे में सफाईकर्मी होने की जानकारी दी।

बैंक खातों को लेकर भी सामने आए सवाल

जीएसटी विभाग के सत्यापन में कुछ लोगों ने फर्मों के साथ कारोबार करने से इनकार किया। कुछ लोगों ने तो संबंधित फर्मों के नाम पर जीएसटी रिकॉर्ड में दर्ज बैंक खातों को अपना होने से भी इनकार किया। इसके अलावा कई पते पर फर्मों का वास्तविक संचालन नहीं मिला। विभाग अब इन दस्तावेजों और लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रहा है।

फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों की भी जांच

विभाग के अनुसार, कुछ किरायानामों में संबंधित लोगों के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन फर्मों को किस तरीके से बनाया गया और इनके जरिए लेन-देन किसने संचालित किया। पुलिस ने अमन अग्रवाल के खिलाफ अपराध दर्ज कर दस्तावेज, बैंक खाते और संबंधित फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।

Naveen Kumar Sahu
लेखक / पत्रकार:

Naveen Kumar Sahu

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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