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ड्राइविंग लाइसेंस से बस परमिट तक सब महंगा! सालों बाद बदली फीस, जानें किस काम के लिए लगेंगे कितने पैसे?

Driving License Fees Chhattisgarh: ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और व्यावसायिक वाहनों से जुड़े काम अब वाहन मालिकों की जेब पर ज्यादा असर डालेंगे। छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग ने लंबे अंतराल के बाद अपनी विभिन्न सेवाओं की फीस में बदलाव किया है। नई दरों को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है और प्रकाशन की तारीख से ही […]

New Transport Fees
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Driving License Fees Chhattisgarh: ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और व्यावसायिक वाहनों से जुड़े काम अब वाहन मालिकों की जेब पर ज्यादा असर डालेंगे। छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग ने लंबे अंतराल के बाद अपनी विभिन्न सेवाओं की फीस में बदलाव किया है। नई दरों को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है और प्रकाशन की तारीख से ही नई शुल्क व्यवस्था लागू हो गई है।

नई शुल्क व्यवस्था का असर आम वाहन मालिकों पर भी पड़ेगा। डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, लाइसेंस का नवीनीकरण कराने, ड्राइविंग बैज लेने और चिकित्सा प्रमाण-पत्र जैसी सेवाओं के लिए अब पहले की तुलना में ज्यादा शुल्क देना होगा। विभाग ने कई सेवाओं की दरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।

बस परमिट का शुल्क चार गुना बढ़ा

परिवहन विभाग के नए शुल्क में सबसे बड़ी बढ़ोतरी बस परमिट को लेकर सामने आई है। पहले जहां बस परमिट के लिए 2,500 रुपये शुल्क देना पड़ता था, वहीं अब यह राशि बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई है। यानी बस परमिट का शुल्क सीधे चार गुना हो गया है। इसका असर व्यावसायिक वाहन संचालकों पर पड़ सकता है।

टैक्सी और मालवाहक वाहनों पर भी बढ़ेगा खर्च

नई व्यवस्था का असर केवल बस संचालकों तक सीमित नहीं है। टैक्सी, मालवाहक और अन्य यात्री या व्यावसायिक वाहनों से जुड़े परमिट के लिए भी नई दरें लागू होंगी। परमिट बनवाने, नवीनीकरण कराने, उसमें बदलाव करने, वाहन बदलने या परमिट दूसरे व्यक्ति के नाम कराने जैसी प्रक्रियाओं के लिए अब पहले से अधिक शुल्क देना होगा।

परमिट देर से रिन्यू कराया तो बढ़ेगा शुल्क

परमिट की वैधता खत्म होने के बाद नवीनीकरण कराने वालों के लिए भी नई व्यवस्था में अतिरिक्त आर्थिक बोझ रखा गया है। 90 दिन के भीतर नवीनीकरण कराने पर एक निर्धारित शुल्क लगेगा। देरी 180 दिन, 365 दिन या उससे अधिक होने पर शुल्क की राशि और बढ़ती जाएगी। यानी जितनी ज्यादा देरी, उतना ज्यादा भुगतान करना होगा।

किसानों को परमिट प्रक्रिया में राहत

नई शुल्क व्यवस्था में कुछ वर्गों के लिए राहत का प्रावधान भी रखा गया है। अपने नाम के ट्रैक्टर या ट्रॉली से संबंधित परमिट प्रक्रिया कराने वाले किसानों से निर्धारित शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आवेदकों को सामान्य शुल्क का 50 प्रतिशत ही देना होगा। इसके लिए संबंधित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना जरूरी होगा।

किराए पर पड़ सकता है असर

परमिट और दूसरी परिवहन सेवाओं की लागत बढ़ने से व्यावसायिक वाहन संचालकों का खर्च बढ़ सकता है। बस और अन्य यात्री वाहनों के मामले में संचालक बढ़ी हुई लागत की भरपाई किराए के माध्यम से करने की मांग कर सकते हैं। हालांकि किराए में वास्तविक बढ़ोतरी होगी या नहीं, यह संबंधित निर्णय और स्वीकृति पर निर्भर करेगा।

Naveen Kumar Sahu
लेखक / पत्रकार:

Naveen Kumar Sahu

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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