IGKV Paper Leak Case: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की कीट विज्ञान परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्र के WhatsApp पर वायरल होने से मचे हड़कंप के बाद पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़ ली हैं। जांच में पेपर लीक का सिरा दुर्ग के एक निजी कॉलेज तक पहुंचा है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक प्रोफेसर समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं कुछ छात्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
मामले में पुलिस ने केवल पूछताछ और पारंपरिक जांच तक सीमित रहने के बजाय मोबाइल फोन और WhatsApp चैट को अहम सबूत बनाया। अलग-अलग जिलों में की गई दबिश और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई।
परीक्षा से पहले ही WhatsApp पर पहुंच गया था पेपर
20 अगस्त को IGKV की कीट विज्ञान परीक्षा होनी थी। परीक्षा शुरू होने में करीब दो घंटे बाकी थे, तभी प्रश्नपत्र WhatsApp के जरिए छात्रों के बीच पहुंच गया। देखते ही देखते पेपर के वायरल होने की जानकारी विश्वविद्यालय तक पहुंची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने परीक्षा को स्थगित कर दिया और पूरे मामले की शिकायत तेलीबांधा थाने में की गई।
पांच जिलों तक पहुंची जांच की आंच
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने रायपुर के साथ दुर्ग, कवर्धा, राजनांदगांव और बिलासपुर में जांच और दबिश की कार्रवाई की। मोबाइल फोन की जांच और WhatsApp पर हुई बातचीत ने पुलिस को उन लोगों तक पहुंचने में मदद की, जिनके जरिए प्रश्नपत्र आगे भेजे जाने की आशंका है। इसी जांच के बाद प्रोफेसर समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
ऐसे खुली पेपर लीक की कड़ी
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक प्रश्नपत्र दुर्ग के एक निजी कॉलेज से बाहर निकलने की आशंका है। इसके बाद डिजिटल माध्यम से इसे आगे भेजा गया और WhatsApp ग्रुप या व्यक्तिगत चैट के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। हालांकि प्रश्नपत्र कॉलेज से किसने बाहर निकाला और उसे पहली बार किस व्यक्ति ने डिजिटल माध्यम से शेयर किया, इसका पूरा जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
छात्रों तक भी पहुंची पेपर लीक की जांच
इस मामले में छात्रों की भूमिका भी पुलिस के रडार पर है। जांच के दौरान अब तक 16 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। कवर्धा के दो छात्रों से भी पुलिस पूछताछ कर चुकी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन छात्रों को प्रश्नपत्र पहले मिला, उन्होंने इसे आगे शेयर किया या नहीं और पेपर के बदले किसी तरह का लेन-देन हुआ था या नहीं।
मोबाइल बना पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग
पूरे मामले में WhatsApp चैट और मोबाइल फोन की जांच अहम साबित हुई है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के जरिए पेपर के लीक होने से लेकर छात्रों तक पहुंचने तक की पूरी टाइमलाइन तैयार कर रही है। अब जांच का अगला फोकस पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की पहचान करना है। पुलिस यह भी जांच रही है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति इस नेटवर्क में शामिल था या नहीं।
परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
परीक्षा शुरू होने से महज दो घंटे पहले प्रश्नपत्र का WhatsApp पर वायरल हो जाना विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि मामला केवल पेपर वायरल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक नेटवर्क होने की आशंका है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।


