Raipur Municipal Corporation LIDAR Survey: शहर में करीब 10 साल बाद एक-एक मकान और संपत्ति का हाईटेक सर्वे होने जा रहा है। नगर निगम LIDAR Survey के जरिए शहर की संपत्तियों की 3D फोटोग्राफी, लोकेशन, नंबरिंग और उनके आवासीय या व्यावसायिक उपयोग का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगा।
निगम का दावा है कि इससे ऐसी संपत्तियों की पहचान हो सकेगी, जिनसे अभी पूरा संपत्ति कर नहीं मिल रहा है। सर्वे पर करीब 5 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
3.60 लाख संपत्तियों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
नगर निगम के मुताबिक अभी शहर में करीब 3.60 लाख प्रॉपर्टी हैं। इनमें से 3.48 लाख संपत्तियों से संपत्ति कर वसूला जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में शहर का विस्तार और मकानों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में पुराना रिकॉर्ड अपडेट करने और सभी संपत्तियों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के लिए नया सर्वे कराया जा रहा है। लिडार सर्वे में हर संपत्ति की थ्रीडी फोटोग्राफी के साथ उसकी लोकेशन, नंबरिंग और उपयोग से जुड़ी जानकारी एक जगह दर्ज की जाएगी। इससे निगम के पास शहर की संपत्तियों का अपडेटेड डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।
550 करोड़ तक पहुंच सकती है संपत्ति कर वसूली
नगर निगम को वित्तीय वर्ष 2025-26 में संपत्ति कर से 330 करोड़ रुपए मिले थे। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 475 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा गया है। निगम अधिकारियों के मुताबिक लिडार सर्वे के बाद संपत्ति कर से होने वाली वसूली 550 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। निगम का कहना है कि अगले वित्तीय वर्ष 2027-28 में पात्र संपत्तियों को टैक्स के दायरे में लाने पर जोर रहेगा। सर्वे से ऐसी संपत्तियों की भी पहचान की जाएगी, जो अभी टैक्स के रिकॉर्ड में पूरी तरह दर्ज नहीं हैं।
आवासीय संपत्ति का कमर्शियल इस्तेमाल भी पकड़ेगा सर्वे
शहर में कुछ ऐसी संपत्तियां भी हैं, जिनकी अनुमति और टैक्स रिकॉर्ड आवासीय उपयोग के लिए है, लेकिन उनका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इसी तरह कहीं निर्माण हो चुका है, लेकिन रिकॉर्ड में संपत्ति को खाली प्लॉट बताया गया है। लिडार सर्वे में संपत्ति की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद निगम ऐसी संपत्तियों की पहचान कर सकेगा। इसके बाद नियमों के अनुसार टैक्स का दोबारा आकलन किया जाएगा और संबंधित संपत्तियों को डिमांड नोटिस जारी किया जा सकेगा।
तीन एजेंसियां टेंडर में शामिल
लिडार सर्वे के लिए नगर निगम ने टेंडर जारी किया था। इसमें तीन एजेंसियां शामिल हुई हैं। अब निविदा समिति इनके प्रस्तावों की जांच करेगी। चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव एमआईसी के सामने रखा जाएगा।एमआईसी की मंजूरी के बाद एजेंसी को सर्वे का काम सौंपा जाएगा और शहर में लिडार सर्वे शुरू होगा। नगर निगम के अपर आयुक्त लोकेश्वर साहू के अनुसार लिडार सर्वे के लिए तीन कंपनियां सामने आई हैं। पांच करोड़ रुपए के टेंडर की जांच निविदा समिति करेगी। इसके बाद प्रस्ताव एमआईसी में रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही शहर में सर्वे का काम शुरू किया जाएगा।
क्या है LIDAR Survey?
लिडार एक आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीक है। इसमें लेजर किरणों की मदद से किसी क्षेत्र या वस्तु का सटीक थ्रीडी मॉडल तैयार किया जाता है। लेजर पल्स जमीन या किसी वस्तु पर भेजी जाती हैं। उनके वापस लौटने में लगे समय के आधार पर दूरी मापी जाती है। इस तकनीक से जमीन, इमारत, पेड़ और सड़क जैसी संरचनाओं का डिजिटल मॉडल तैयार किया जा सकता है। रायपुर में इसका इस्तेमाल शहर की संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए किया जाएगा।
पहले हो चुका है GIS सर्वे
आर्किटेक्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ रहटगांवकर के मुताबिक रायपुर में इससे पहले सूडा की ओर से GIS सर्वे कराया गया था। इसका उद्देश्य शहर की संपत्तियों और उनसे मिलने वाले संपत्ति कर के बीच के अंतर को कम करना था। उनके मुताबिक अब शहर में मकानों की संख्या और उनके आकार में बदलाव हुआ है। ऐसे में संपत्तियों और संपत्ति कर का सटीक आकलन करने के लिए नए सर्वे की जरूरत है। लिडार तकनीक से संपत्तियों की पहचान और उनकी मौजूदा स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।



