Law & Order Issue Raised During Zero Hour - बीजेपी नेताओं को टारगेट करने का चंदेल ने उठाया मुद्दा
Law & Order Issue Raised During Zero Hour - बीजेपी नेताओं को टारगेट करने का चंदेल ने उठाया मुद्दा

रायपुर। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने एक नवम्बर से घोषित धान खरीदी की व्यवस्थाओं को अपर्याप्त बताते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने भाजपा की लगातार मांग के दबाव में समय पर धान खरीदी की मुनादी तो पीट दी लेकिन सुव्यवस्थित तरीके से धान खरीदी का इंतजाम नहीं किया है।

एक रोज बाद धान खरीदी शुरू होना है और सरकार इससे ज्यादा नृत्य उत्सव की तैयारी में व्यस्त है। जैसी गंभीरता नृत्य की तैयारी देखने में दिखाई जा रही है, वैसी गंभीरता धान खरीदी की व्यवस्था में नजर नहीं आ रही। सरकार प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान खरीदी सुनिश्चित करें।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने इस वर्ष 1 लाख 10 हजार मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। गत वर्ष की स्थिति हम सभी ने देखी है। पिछले साल राज्य सरकार की लापरवाही के कारण बारदाने को लेकर किसानों को परेशान किया गया, उसे किसान भूले नहीं हैं। इस साल भी धान खरीदी केंद्रों में पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। जिसकी वजह से इस बार भी किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार गीले धान का बहाना बनाकर किसानों को निराश करती है। इस साल इस तरह की कोई बहानेबाजी भाजपा चलने नहीं देगी। किसान जो भी धान लेकर आयें, सरकार उसे खरीदें।

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नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि जैसे तैसे धान खरीदी हो जाती है तो उसका परिवहन सलीके से नहीं होता। समय पर परिवहन नहीं होने के कारण धान सड़ जाता है। इसलिए खरीदी के फौरन बाद धान के परिवहन की व्यवस्था सुचारू रूप से की जाए। सरकार स्पष्ट करे कि धान खरीदी के लिए कितने शेड का निर्माण हुआ है और धान के रखरखाव की क्या व्यवस्था है? किसानों को टोकन के नाम पर परेशान किया जाता है। इस तरह की परेशानी बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते दिनों हुई बारिश से कई किसानों का धान भीग गया है। सरकार इस बारे में क्या सोच रही है, यह भी स्पष्ट किया जाए। किसी भी हाल में किसान को नुकसान नहीं होना चाहिए। सरकार किसानों के लिए समुचित मुआवजे की व्यवस्था करे।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले वर्ष गिरदावरी के माध्यम से किसानों का रकबा कम कर दिया गया था छोटे व मझले किसानों की जमीनों को विलुप्त कर दिया गया था यह किसानों के साथ अन्याय है यह नहीं होना चाहिए।साथ ही उन्होंने सरकार से प्रश्न किया कि ऐसा कैसे होता है कि जितना उत्पादन होता है उतनी ही खरीदी सरकार करने का दावा करती है जबकि वह रकबा भी कम करती है एवं प्रति एकड़ केवल 15 क्विंटल ही धान खरीदती है सरकार के पास ऐसा कौन सा कैलकुलेटर है जो यह कैलकुलेट करता है जरा उसे जनता को बताएंगे।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।