Chhattisgarh Teachers Cyber Fraud: छत्तीसगढ़ में शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे सहित प्रदेश के कई शिक्षकों को साइबर ठग द्वारा निशाना बनाए जाने का मामला सामने आया है। संघ के अनुसार, एक ही स्कूल या संस्था में काम करने वाले कई शिक्षकों को एक ही मोबाइल नंबर से संदिग्ध कॉल आए।
कॉल करने वालों ने खुद को साइबर क्राइम इंस्पेक्टर बताकर शिक्षकों पर दबाव बनाने और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाने की कोशिश की। इस घटनाक्रम के बाद शिक्षकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
एक ही स्कूल के कई शिक्षकों को एक नंबर से कॉल
शालेय शिक्षक संघ के मुताबिक, संदिग्ध कॉल का पैटर्न चिंता बढ़ाने वाला है। एक ही स्कूल या संस्था में काम करने वाले शिक्षकों को एक ही मोबाइल नंबर से फोन आने की बात कही गई है। कॉल करने वालों ने कथित तौर पर खुद को साइबर क्राइम इंस्पेक्टर बताया और शिक्षकों को कानूनी परेशानी में फंसाने का डर दिखाया। संघ का कहना है कि इस तरीके से शिक्षकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, कॉल करने वालों की पहचान और उनके पास शिक्षकों की जानकारी पहुंचने के स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
शिक्षकों के डेटा की सुरक्षा पर सवाल
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने शिक्षा विभाग की डेटा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों की व्यक्तिगत, शैक्षणिक और गोपनीय जानकारियां विभागीय रिकॉर्ड में रहती हैं। ऐसे में यदि इन जानकारियों का इस्तेमाल ठगी की कोशिश में हो रहा है, तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि वे संबंधित लोगों तक कैसे पहुंचीं। दुबे ने विभाग से यह भी सवाल किया है कि शिक्षकों को संभावित आर्थिक नुकसान और सामाजिक प्रतिष्ठा को पहुंचने वाली ठेस की स्थिति में प्रशासन अपनी जिम्मेदारी कैसे तय करेगा।
VSK (Vidya Samiksha Kendra) ऐप की सुरक्षा को लेकर संघ की आशंका
संघ ने विभाग के वीएसके ऐप यानी विद्या समीक्षा केंद्र और अन्य डिजिटल पोर्टलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी आशंका जताई है। संगठन का दावा है कि उसने पहले भी शिक्षकों के डेटा के असुरक्षित माध्यमों से बाहर जाने की संभावना पर चिंता व्यक्त की थी। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि संदिग्ध कॉल का संबंध VSK ऐप या शिक्षा विभाग के किसी अन्य पोर्टल से डेटा लीक होने से है। इस आशंका की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच और संबंधित विभाग का पक्ष जरूरी होगा।
साइबर ठगी से करोड़ों के नुकसान का दावा
संघ की ओर से साझा की गई जानकारी में विधानसभा और पुलिस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में पिछले डेढ़ से दो वर्षों के दौरान साइबर ठगी के कई मामले सामने आए हैं और लोगों को 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। राजधानी रायपुर में भी करोड़ों रुपये की ठगी के मामले दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में इन आंकड़ों की सटीक अवधि, मामलों की संख्या और संबंधित आधिकारिक रिपोर्ट का ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए इनके प्रकाशन से पहले मूल सरकारी आंकड़ों का मिलान करना जरूरी है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
शिक्षकों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर नाराजगी की बात कही गई है। शालेय शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की जांच कर संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा नहीं किया गया और शिक्षकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन आंदोलन कर सकता है। संघ के प्रांतीय मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने भी बढ़ते साइबर अपराधों के बीच सरकारी डिजिटल व्यवस्था में दर्ज जानकारी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। अब मामले में यह स्पष्ट होना अहम होगा कि संदिग्ध कॉल किसने किए, शिक्षकों की जानकारी कहां से हासिल की गई और क्या किसी डिजिटल प्रणाली में सुरक्षा संबंधी चूक हुई है।



