रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर विभाग मध्य प्रदेश से बाघों के आयात की तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी ओर अपने ही राज्य में मौजूद, पूरी तरह स्वस्थ हो चुके बाघ को जंगल में छोड़ने को लेकर उदासीनता बरती जा रही है।

जानकारी के अनुसार वन विभाग गुरु घासीदास–तमोर पिंगला और उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघों को बसाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए शिकार प्रजातियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सॉफ्ट रिलीज़ के नाम पर बाड़े तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन इसी बीच नंदनवन जंगल सफारी, रायपुर में एक ऐसा बाघ कैद है, जिसे विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया है।

यह बाघ अप्रैल 2025 में बीजापुर वन मंडल क्षेत्र में शिकारियों द्वारा लगाए गए लोहे के फंदे में फंसकर गंभीर रूप से घायल हुआ था। लंबे समय तक फंदा न हटने के कारण उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई। बाद में उसे उपचार के लिए रायपुर लाया गया, जहां जुलाई 2025 में उसकी जटिल सर्जरी की गई। नवंबर 2025 में चार विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि बाघ पूरी तरह स्वस्थ है, सामान्य रूप से चल-दौड़ सकता है। सर्जरी का घाव पूरी तरह भर चुका है और वहां दोबारा बाल उग आए हैं। बाघ घायल पैर पर पूरा वजन डाल पा रहा है तथा पंजे की पकड़ (ग्रिप) सामान्य है। चलने, दौड़ने या जमीन से उठते समय दर्द के कोई लक्षण नहीं दिखे। बाघ दोनों पिछले पैरों पर आराम से पूरे शरीर का वजन संभाल पा रहा है। अब वह जंगल में छोड़े जाने के लिए उपयुक्त है।

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इसके बावजूद दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वन विभाग की ओर से बाघ की सॉफ्ट रिलीज़ को लेकर कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है। रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने इस देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब चिकित्सकीय रूप से बाघ को फिट घोषित किया जा चुका है, तो उसे कैद में रखना उसके प्राकृतिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस बाघ से जुड़ी जानकारी उच्च न्यायालय में चल रहे मामले के दौरान सामने नहीं रखी गई, जबकि विभाग के उच्च अधिकारी इस घटना से अवगत थे। सिंघवी का कहना है कि यदि यह स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो यह पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।