Raipur Airport Privatization: केंद्र सरकार ने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए देश के 11 हवाई अड्डों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (public Private Partnership) मॉडल के तहत निजी कंपनियों को सौंपने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) की 4 अगस्त को हुई बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के इस कदम पर सहमति बनी। इस योजना के तहत 5 बड़े और 6 छोटे हवाई अड्डों को मिलाकर कुल 5 समूहों में विभाजित किया गया है, जिन्हें 50 वर्षों के पट्टे (लीज) पर दिया जाएगा।
इस परियोजना के माध्यम से हवाई अड्डों के विकास और परिचालन के लिए कुल 8,622 करोड़ रुपये के निजी पूंजीगत निवेश का अनुमान है। बाजार में किसी एक कंपनी के एकाधिकार और अत्यधिक कर्ज के जोखिम को रोकने के लिए प्रत्येक बोलीदाता के लिए समूहों की संख्या सीमित रखी जाएगी। हवाई अड्डों को जिन 5 समूहों में बांटा गया है, उनमें अमृतसर व कांगड़ा-गग्गल (ग्रुप 1), वाराणसी, गया व कुशीनगर (ग्रुप 2), भुवनेश्वर व हुबली (ग्रुप 3), रायपुर व औरंगाबाद (ग्रुप 4) और तिरुचिरापल्ली व तिरुपति (ग्रुप 5) शामिल हैं।


पीपीपी मॉडल का क्या हैं उद्देश्य?
देश में हवाई अड्डों की क्षमता बढ़ाने और यात्री सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने के लिए सरकार पहले भी कई प्रमुख हवाई अड्डों को पीपीपी मॉडल पर निजी हाथों में सौंप चुकी है। इस चरणबद्ध प्रक्रिया में चरणबद्ध तरीके से बड़े हवाई अड्डों के साथ छोटे क्षेत्रीय हवाई अड्डों को जोड़ा गया है, ताकि छोटे शहरों के एयरपोर्ट का विकास भी बड़े एयरपोर्ट के साथ सुनिश्चित हो सके। इससे पहले नई दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और लखनऊ जैसे हवाई अड्डों का पीपीपी मॉडल के जरिए सफल संचालन किया जा रहा है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने क्या कहा ?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि निजीकरण की प्रक्रिया के दौरान मौजूदा कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक, जब हवाई अड्डों का प्रबंधन निजी कंपनियों को सौंपा जाएगा, तब भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के मौजूदा कर्मचारियों के साथ एक साल की संयुक्त प्रबंधन अवधि रखी जाएगी। इससे परिचालन की निरंतरता बनी रहेगी और कर्मचारियों के समायोजन की प्रक्रिया सुगम हो सकेगी।
यात्री सुविधाओं और विमानन क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
हवाई अड्डों के निजी प्रबंधन के तहत आने से टर्मिनल भवनों के आधुनिकीकरण, कार्गो क्षमताओं के विस्तार और नई उड़ानों के संचालन में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ आने वाले समय में एयरपोर्ट शुल्क और पैसेंजर सर्विस फीस में बदलाव हो सकते हैं, जिन पर नियामक संस्था का नियंत्रण रहेगा। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होने से इन राज्यों में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।


