इस जिले के 11 गावों में कोरोना की नहीं हो सकी एंट्री, ग्रामीणों की सूझबूझ और जागरूकता आयी काम

इस जिले के 11 गावों में कोरोना की नहीं हो सकी एंट्री, ग्रामीणों की सूझबूझ और जागरूकता आयी काम
इस जिले के 11 गावों में कोरोना की नहीं हो सकी एंट्री, ग्रामीणों की सूझबूझ और जागरूकता आयी काम

सुकमा। अक्सर हम कोरोना को लेकर लापरवाही बरतने वालों की चर्चा करते हैं, क्योंकि covid प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के चलते ही अधिकांश स्थानों पर इस महामारी का सान्द्रमाँ हुआ और बड़ी संख्या में लोग कल के गाल में समा गए। मगर छत्तीसगढ़ में ऐसे भी अनेक इलाके हैं जहां लोगों की जागरूकता के चलते कोई भी शख्स कोरोना का शिकार नहीं हुआ। नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के 11 ऐसे गांव हैं, जहां कोरोना का संक्रमण ही नहीं हुआ।

सेल्फ कन्टेनमेन्ट जोन बनाकर कोरोना का संक्रमण रोका

सुकमा जिले के 11 ग्राम पंचायतों पोरदेम, गोंडेरास, गोलाबेकुर, जैमेर, कावराकोपा, गोंदपल्ली, चिमलिपेन्टा, नागाराम, मराइगुड़ा (रा), रेगड़गट्टा एवं करिगुण्डम के कुल 29 गांव जिसमें छिंदगढ़ ब्लॉक से 2 गांव जैमेर व कावराकोपा, कोंटा ब्लॉक के 21 गांव और सुकमा विकासखण्ड के 6 गाँव कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कोरोना वायरस की पहुंच से दूर रहे। यहां के ग्रामीणों ने जागरूकता व सुरक्षात्मक उपायों से खुद को सुरक्षित रखा। ग्रामीणों ने एक तरह से सेल्फ कन्टेनमेन्ट जोन बनाकर अपने गांवों को सुरक्षित रखा।

बाहरी लोगों का प्रवेश किया बाधित

गांव तक संक्रमण नहीं फैलने का मुख्य कारण ग्रामीणों की जागरूकता और सतर्कता रही जिन्होंने संक्रमण से बचाने के लिए गांव के बाहर आने जाने पर रोक लगा दी। अतिआवश्यक होने पर ही वे पूरी सावधानी के साथ बाहर गए। जिलें में लॉकडाउन होते ही गांव में प्रवेश करने वाली सड़क पर पेड़ पत्थर इत्यादि के सहारे नाकाबंदी कर बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई और ग्राम पंचायत को सेल्फ कन्टेनमेंट जोन घोषित किया गया। इस दौरान गांवों के लोग अपने घर तक ही सीमित रहे। इसके अलावा शादी विवाह व अन्य कोई सामुहिक कार्यक्रम के आयोजन भी नहीं किए गए। इस कार्य में गांव के बच्चे, बूढ़े जवान सबने अपनी भूमिका निभाई।

कोविड नियमों का किया अनुपालन

इस दौरान लोगों को बिना मास्क के घरों से बाहर न निकलने, शारीरिक दूरी का पालन करने और टीकाकरण के लिए भी प्रेरित किया गया। ग्रामीणों को सामाजिक दूरी रखने और मास्क पहनने का महत्व समझाया गया। गांव में बाहर से आने वाले व्यक्ति की सूचना मिलने पर ग्रामीण प्रशासन को इस संबंध में सूचना देते थे। दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को अनिवार्य रुप से 10 दिवस के लिए नज़दीकी क्वारंटीन सेंटर में रखा गया जहां उनकी नियमित कोरोना जांच की गई। इन ग्राम पंचायतो में संक्रमण से बचाव के सारे उपायों का ही नतीजा है कि यहां अब तक कोरोना संक्रमण से पीड़ित एक भी व्यक्ति नहीं मिला है, जिसके लिए गांव के प्रतिनिधि व ग्रामीणजन बधाई के पात्र हैं।

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