Monday, November 29, 2021
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पैक हाउस योजना से भर रही अफसरों की तिजोरी, करोड़ों का गोलमाल कर सरकार को लगा रहे हैं चूना

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टीआरपी डेस्क। राष्ट्रीय बागवानी मिशन की पैक हाउस योजना कोरबा जिले के अधिकारियों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। जिले के उद्यानिकी विभाग से सेवानिवृत्त सहायक संचालक रात्रे और उनकी टीम ने मिलकर भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन की पैक हाउस योजना की आड़ में अधिकारियों ने सरकार को जमकर पलीता लगाया है। चार लाख रुपए की इस योजना के तहत किसानों को 50% सब्सिडी दी जाती है मगर अधिकारियों ने दो लाख रुपए के अंदर ही खर्च करके किसानों के खाते से पूरे रुपए निकाल लिए।

क्या है पैक हाउस योजना

केंद्र सरकार के बागवानी मिशन के तहत पैक हाउस योजना चलाई जाती है। इसके तहत खेतीबाड़ी से जुड़े सक्षम किसानों का चयन किया जाता है। जिन्हें प्रक्रिया के तहत चार लाख रुपए की लागत से पैक हाउस बनाना होता है। पैक हाउस का मतलब ऐसा कमरा जिसका इस्तेमाल बाड़ी में स्टोर रूम के रूप में किया जाता है। स्टोर रूम का निर्माण चार लाख रुपए की लागत से किया जाना होता है। निर्माण की लागत का आकलन सरकारी इंजीनियर द्वारा किया जाता है। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर उद्यानिकी विभाग 2 लाख रुपए का चेक किसान को देता है।

ऐसे हो रहा है करोड़ों का भ्रष्टाचार

कोरबा जिले में सब कुछ उल्टा पुल्टा चल रहा है उद्यानिकी विभाग के अधिकारी किसान का चयन करते हैं और फिर उसके खाते में सीधे दो लाख रुपए डाल दिया जाता है। यह रकम पैक हाउस के निर्माण के पहले ही किसान के खाते में डाल दी जाती है। बाद में अधिकारियों के दलाल किसान के पास जाकर पूरी रकम का चेक अपने नाम जारी करवा लेते हैं और उसी रकम से पैक हाउस बना कर दिया जाता है।

बमुश्किल 50 से 60 हजार आता है खर्च

ऐसा पैक हाउस, जिसकी कीमत का अंदाजा आप भी लगा सकते हैं, यहां टीन के शेड से बने पैक हाउस की कीमत बमुश्किल 50 से 60 हजार होती है और विभाग के तथाकथित ठेकेदार किसान के खाते से दो लाख रुपए अपने नाम पर निकाल कर लेते हैं। हमने जब ग्राम मुढूनारा के किसानों से बात की तो हितग्राही टिका राम राठिया और बलराम प्रसाद वर्मा ने बताया कि पैक हाउस बनाने वाला ठेकेदार उनके पास आया और खाते में दो लाख रुपए डाले जाने की बात कहते हुए पैक हाउस बनाने के लिए पूरी रकम की मांग की। इन में से अधिकांश के खाते एक्सिस बैंक में खुलवाए गए और इनसे केवल चेक लिए गए और हस्ताक्षर करा लिया गया मगर चेक किसके नाम से होगा इसे लिखवाया नहीं गया।

जिले के पांचों ब्लॉक में ऐसे ही 50 पैक हाउस स्वीकृत

कोरबा जिले में किसानों को पतली चादर का जो पैक हाउस बना कर दिया जा रहा है, उसे भी आधा अधूरा छोड़ा जा रहा है, इसके निचले हिस्से में कोई फर्श बनाए बिना उसे छोड़ दिया गया और किसान के खाते से पूरे के पूरे रुपए निकाल लिए गए। जिले के पांचों ब्लॉक में ऐसे ही 50 पैक हाउस स्वीकृत किए गए हैं, इनमें से कितने का निर्माण हुआ इसकी जानकारी विभाग द्वारा अब तक नहीं दी गई है।

सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक उद्यानिकी विभाग के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक में काम करने वाला कोई सोनी नामक कर्मचारी कर्मचारी खुद को ठेकेदार बता कर किसानों के पास जाता है और उनके खाते का दो लाख रुपए का चेक लेकर आता है। सोनी के कामकाज के बारे में पूरा विभाग जानता है और किसान भी उसे उसे ठेकेदार के रूप में ही जानते हैं बाद में जब पोल खुली तब सोनी अपने आप को इससे अलग बताने लगा। उद्यानिकी विभाग के जिला मुख्यालय में कार्यरत दिनकर नामक अधिकारी को तकनीकी अधिकारी बताया जा रहा है जो पैक हाउस का आकलन करता है।

कोरोना काल का बना रहे बहाना

इस योजना का लाभ उठाने वाले एक किसान के दस्तावेजों से पता चलता है कि तथाकथित ठेकेदारों द्वारा दुर्ग की किसी ठेका कंपनी के माध्यम से पैक हाउस बनवाया जा रहा है। यह कार्य कोरबा की किसी अग्रवाल ठेकेदार और सोनी नामक कर्मचारी द्वारा मिलकर किया जा रहा है। इनके द्वारा पैक हाउस बनाने के बाद किसान से ठेकेदार के बिल और संतुष्टि प्रमाण पत्र आदि पर हस्ताक्षर कराया जाता है। ताकि विभाग का कोई अधिकारी कर्मचारी और ठेकेदार ना फंसे।

हालांकि विभाग से रिटायर हो चुके अधिकारी लखन रात्रे से बात की गई उन्होंने भी खुद को पाक साफ बता दिया, मगर वे उस ठेकेदार का नाम जरूर बताते हैं जिसके नाम का बिल किसान की तरफ से लगाया जा रहा है। किसानों के खाते में पैसे पहले क्यों डाले जा रहे हैं, इस सवाल पर अधिकारी कहते हैं कि ऐसा कोरोना काल के चलते करना पड़ा, यानी यहां भी अधिकारियों ने आपदा में अवसर का लाभ उठाया।

असली पैक हाउस इस तरह का..

अब जरा इस तस्वीर पर नजर डालिए। दरअसल यही असली पैक हाउस है, इस तरह के पैक हाउस रायपुर जिले में उद्यानिकी विभाग द्वारा चयनित किसानों द्वारा बनवाए जा रहे हैं। रायपुर जिले के उद्यानिकी विभाग के उप संचालक नारायण सिंह लवात्रे ने बताया कि उनके यहां पहले किसान अपना पैक हाउस बनवाता है, इस निर्माण की लागत का आकलन वे शासकीय विभाग के इंजीनियर से करवाते हैं, जिसका प्रमाणपत्र प्राप्त होने के बाद वे कुल लागत की आधी रकम का चेक किसान को देते हैं।

खर्च दिखाया 2 लाख का, और बिल बनाया 4 लाख का

आपको बता दें कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत छत्तीसगढ़ के कोरबा सहित कुल 19 जिलों का चयन किया गया है। इनमें से रायपुर और राजनांदगांव सहित कुछ जिलों को छोड़ दिया जाए तो शेष सभी जिलों में इसी तरह टिनें के शेड से पैक हाउस तैयार करके किसानों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। दरअसल किसानों को इस योजना की अच्छी तरह जानकारी नहीं है। उन्हें लगता है कि यह योजना दो लाख रुपए के लागत वाली है, इसलिए उनके खाते में दो लाख रूपए डाले जा रहे हैं, वहीं जो जागरूक और पढ़े लिखे किसान हैं, उन्हें समझाया जाता है कि पैक हाउस बनाने में उनकी जेब से कोई खर्चा नहीं लगेगा, इस शर्त पर ऐसे किसान योजना का लाभ उठाने के लिए राजी हो जाते हैं।

उद्यानिकी विभाग में पैक हाउस योजना में जो भ्रष्टाचार कोरबा जिले में दिखाई दे रहा है वैसा ही दूसरे जिलों में भी किया जा रहा है, इस विभाग के मुखिया और विभागीय मंत्री अगर इसकी समग्र जांच कराएं तो बहुत बड़ा घोटाला सामने आयेगा, क्योंकि एक पैक हाउस में विभाग के अधिकारी और दलाल एक लाख रुपए से अधिक रुपए की बंदरबांट कर रहे हैं, और ऐसे ही सैकड़ों पैक हाउस प्रदेश भर के चयनित जिलों में बनाए गए हैं।

इंजीनियर कौन नहीं मालूम!

इस मामले में जब कोरबा उद्यानिकी विभाग के कोरबा ब्लॉक के सहायक उद्यान अधिकारी डी पी मिश्रा से पूछा गया तब उन्होंने इस बात पर अनभिज्ञता जताई कि उनके ब्लॉक में बनाए गए पैकहाउस का आकलन करने वाले इंजीनियर का नाम क्या है। उन्होंने सारी जिम्मेदारी जिला कार्यालय पर डालते हुए कहा कि इस बारे में जिला कार्यालय के लोग ही बता सकते हैं। उन्होंने ये जरूर बताया की जनपद में पदस्थ आर ई एस के सब इंजीनियर ने आंकलन किया है। जब उनसे यह पूछा गया कि पैक हाउस बनने के पहले ही किसानों के खाते में दो लाख रुपए कैसे डाल दिए गए, तब उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि रुपए तो पैक हाउस बनने के बाद ही डाले गए हैं

पक्के का बनना चाहिए पैक हाउस : सहायक संचालक

कोरबा जिले में हाल ही में पदस्थ उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक ने पैक हाउस के संबंध में पूछे जाने पर कहा कि उन्होंने अब तक फील्ड में देखा नहीं है। हालांकि जब उनसे पूछा गया तब उन्होंने कहा कि वे जहां पूर्व में पदस्थ से वहां पक्के का पैक हाउस बनाया गया है। सहायक संचालक विशाल सिंह यादव ने बताया कि अगर किसानों के खाते में चेक पहले से डाल दिए गए हैं तो यह सही नहीं है। वे इस संबंध में अपने अधीनस्थों से चर्चा करके बताएंगे।

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