Network supplying bank accounts busted: साइबर ठगों को म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। SP त्रिलोक बंसल के निर्देश पर सिटी कोतवाली पुलिस ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इनके खातों से 95 लाख से अधिक का संदिग्ध लेनदेन मिला।
पकड़े गए आरोपी ग्रामीणों को थोड़े पैसों का लालच देकर इंडियन ओवरसीज बैंक और PNB बेमेतरा में खाते खुलवाते थे। ये पासबुक, ATM, लिंक SIM अपने पास रखकर साइबर ठगों को भेज देते थे। रेखराज, त्रिपुरारी जैसे खाते रायपुर निवासी ‘सैकी’ को 7000 रुपये प्रति खाता पर दिए जाते थे। इन खातों में देशभर की ऑनलाइन ठगी की रकम मंगाई जाती थी।
एक खाते में 95.09 लाख..!
IOB बेमेतरा शाखा में दुष्यंत कुमार साहू के खाते में कुछ महीनों में 95 लाख 9 हजार जमा हुए, 94.92 लाख निकाले भी गए। साइबर पोर्टल जांच में पता चला विशाखापट्टनम आंध्र प्रदेश और त्रिवल्लूर तमिलनाडु के पीड़ितों की ठगी की रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर हुई। PNB के अन्य खातों में भी लाखों का संदिग्ध लेनदेन।
पकड़े गए आरोपी:
साहिल महिलांगे, नंद कुमार, थनवार यादव, सागर यादव, रेखराज कुर्रे, त्रिपुरारी साहू, करण चंद्राकर, शंकर वर्मा, गगन वर्मा, शुभम वर्मा और संतोष साहू। BNS धारा 317(2), 317(4), 318(4), 61(2) में केस दर्ज।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:
Q1. कितने आरोपी पकड़े?
11 आरोपी, सिटी कोतवाली पुलिस ने SP त्रिलोक बंसल के निर्देश पर।
Q2. खाते कैसे इस्तेमाल होते थे?
ग्रामीणों से खाता खुलवाकर पासबुक ATM SIM लेकर 7000 में साइबर ठगों को बेचते थे।
Q3. सबसे बड़ा लेनदेन कितना?
दुष्यंत साहू IOB खाते में 95.09 लाख जमा, 94.92 लाख निकासी।
Q4. ठगी कहां के पीड़ितों से?
आंध्र प्रदेश विशाखापट्टनम और तमिलनाडु त्रिवल्लूर।
Q5. कौन सी धाराएं?
BNS 317(2), 317(4), 318(4), 61(2) में अपराध दर्ज।



