Convicted teacher continued teaching at school: शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक शिक्षिका से छेड़छाड़ के मामले में कोर्ट से सजा मिलने के बाद भी दोषी शिक्षक 24 दिन तक बाकायदा स्कूल में ड्यूटी करता रहा। मामला मीडिया में उछलने के बाद अब विभाग की नींद टूटी है और DEO ने बर्खास्तगी का प्रस्ताव JD को भेजने की तैयारी शुरू की है।
आरोपी शिक्षक विवेक गुप्ता बेलमुंडी स्कूल में पदस्थ है। तखतपुर न्यायालय ने 26 सितंबर 2026 को उसे महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके बावजूद वह लगातार स्कूल आता रहा। प्रधान पाठक संजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि शिक्षक 16 अक्टूबर को भी स्कूल में मौजूद था। प्रधान पाठक का कहना है कि शिक्षक ने सजा की जानकारी उन्हें नहीं दी थी।
क्या था मामला ?
अभियोजन के अनुसार घटना 17 फरवरी 2018 की है। शासकीय प्राथमिक शाला चनाडोंगरी में पदस्थ महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया था कि विवेक गुप्ता ने उनका हाथ पकड़कर खींचा, सीने पर हाथ लगाया। विरोध पर चरित्र को लेकर अपमानजनक बातें कहीं और दीवार की ओर धकेल दिया, जिससे चेहरे और सिर में चोटें आईं। इस दौरान तेजाब फेंकने और जान से मारने की धमकी भी दी गई।
कोर्ट ने सुनाई सजा
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋचा यादव की अदालत ने IPC धारा 354 (छेड़छाड़) में 1 साल सश्रम कारावास और 1000 रुपये जुर्माना, धारा 323 (मारपीट) में 1000 रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना न देने पर हर धारा में एक-एक महीने की अतिरिक्त सजा। साथ ही 7 अगस्त से 9 अक्टूबर 2018 तक जेल में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने पीड़िता की गवाही, गवाहों और मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर छेड़छाड़ और मारपीट प्रमाणित मानी, जबकि पीछा करने, गाली-गलौज और धमकी के आरोपों में सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ देकर छोड़ दिया गया।
अभियोजन पक्ष ने नहीं दी जानकारी
इस मामले में बिलासपुर DEO संदीप पांडेय ने टीआरपी न्यूज़ को बताया कि उन्हें शिक्षक को दी गई सजा की जानकारी नहीं थी। अब न्यायालय के आदेश की प्रति मंगाकर प्राथमिकता से कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभियोजन पक्ष याने पुलिस को अदालत के फैसले की जानकारी शिक्षा विभाग को दी जानी चाहिए थी, मगर ऐसा नहीं किया गया। संबंधित शिक्षक मिडिल स्कूल में पदस्थ है, इसलिए मामले में कार्रवाई का अधिकार जेडी याने संयुक्त संचालक, शिक्षा को है। इसलिए अब शिक्षक को बर्खास्त करने का प्रस्ताव जेडी को भेजा जायेगा।
कोर्ट द्वारा दी गई छूट का लाभ उठाया शिक्षा ने
दरअसल किसी भी अदालत द्वारा दोषी पाए गए शख्स को 3 वर्ष से कम की सजा सुनाने के साथ ही उसे अगली अदालत में अपील के लिए जमानत देने का भी प्रावधान है। संभवतः न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा दोषी पाए गए शिक्षक विवेक गुप्ता ने इसी का फायदा उठाया। ऊंची अदालत में अपील करने तक उसने सजा मिलने की बात छिपाने का षड्यंत्र रचा। हालांकि अब मामले का पटाक्षेप हो चुका है।
अब क्या होगा? – नियम 19 के तहत बर्खास्तगी
अधिवक्ता अनुराग वाजपेयी ने टीआरपी न्यूज़ को बताया कि सरकारी कर्मचारी के आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 19 के तहत दोषसिद्धि के आधार पर विभागीय कार्रवाई कर बर्खास्त किया जा सकता है। इसी नियम के तहत अब DEO प्रस्ताव JD को भेजेंगे।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. शिक्षक को किस मामले में सजा हुई?
2018 में शासकीय प्राथमिक शाला चनाडोंगरी की महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में तखतपुर कोर्ट ने IPC 354 में 1 साल की सजा सुनाई है।
Q2. सजा के बाद भी स्कूल कैसे आता रहा?
26 सितंबर को सजा के बाद भी आरोपी विवेक गुप्ता ने कोर्ट के आदेश की जानकारी विभाग और प्रधान पाठक को नहीं दी, इसलिए वह 16 अक्टूबर तक स्कूल आता रहा।
Q3. अब विभाग क्या कार्रवाई कर रहा है?
मामला मीडिया में आने के बाद DEO संदीप पांडेय ने कोर्ट के आदेश की प्रति मंगाई है और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 19 के तहत बर्खास्तगी का प्रस्ताव JD को भेजा जा रहा है।
Q4. कोर्ट ने किन आरोपों में बरी किया?
कोर्ट ने छेड़छाड़ और मारपीट प्रमाणित मानी, लेकिन पीछा करने, अश्लील गाली-गलौज और तेजाब फेंकने की धमकी के आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया।



