Blue Drum Case: देशभर में सनसनी फैलाने वाले मेरठ के बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड, जिसे ‘नीला ड्रम केस’ के नाम से भी जाना जाता है, उसमें 30 सितंबर को यानी बुधवार को अदालत का फैसला आने की पूरी संभावना है। इस सनसनीखेज मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल 22 गवाहों के बयान और कई अहम वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए गए हैं।
अभियोजन और पीड़ित पक्ष को उम्मीद है कि मुख्य आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को उनके किए की कड़ी सजा मिलेगी, जबकि बचाव पक्ष ने चश्मदीद न होने का हवाला देकर राहत की मांग की है।
साजिश: फल काटने के बहाने चाकू और अनाज के लिए खरीदा ड्रम
गवाहों के बयानों और पुलिस की जांच में सामने आया कि इस खौफनाक हत्याकांड को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने पहले से पूरी तैयारी की थी। गवाहों के मुताबिक, आरोपी मुस्कान ने फल और सब्जी काटने का बहाना बनाकर एक दुकान से चाकू और उस्तरा खरीदा था। इसके बाद दोनों ने अनाज रखने का झांसा देकर बाजार से 1200 लीटर का एक बड़ा नीला प्लास्टिक ड्रम और ई-रिक्शा के जरिए सीमेंट-बालू खरीदा था, जिसका इस्तेमाल बाद में शव को छिपाने के लिए किया गया।
गवाहों की जुबानी: परिवार की आशंका और पड़ोसियों की गवाही
मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृतक सौरभ के भाई बबलू कुमार और मां रेणु देवी ने कोर्ट को बताया कि सौरभ को अपनी जान का खतरा था। सौरभ जब लंदन से अपनी बेटी का जन्मदिन मनाने मेरठ आया था, तब उसकी पत्नी मुस्कान अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दे चुकी थी। एक पड़ोसी गवाह ने भी कोर्ट को बताया कि उसने तीन मार्च की रात साहिल को सौरभ के घर के अंदर जाते हुए देखा था, जिसके बाद सौरभ का सुराग मिलना बंद हो गया था।
नशीली दवा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल लोकेशन
मामले को साबित करने के लिए पुलिस और डॉक्टरों की गवाहियां बेहद अहम रहीं। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने कोर्ट को बताया कि सौरभ के शरीर पर चाकू के गहरे निशान थे और उसका सिर व हाथ धड़ से अलग कर दिए गए थे। मेडिकल स्टोर संचालक और डॉक्टरों के बयानों से यह भी साफ हुआ कि हत्या से पहले उसे साजिश के तहत नशीली दवा दी गई थी। इसके अलावा, आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल (CDR), टावर लोकेशन और मनाली-कसोल घूमने के दौरान कैब ड्राइवर की गवाही ने भी इस अपराध की कड़ियों को आपस में जोड़ दिया।
क्या था पूरा ‘नीला ड्रम केस’ और कैसे हुआ खुलासा?
लंदन में काम करने वाला सौरभ 24 फरवरी 2025 को मेरठ लौटा था, जिसके बाद 3 मार्च की रात उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने उसके शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में डाले और ऊपर से सीमेंट भरकर सील कर दिया था। पुलिस ने जब ब्रह्मपुरी स्थित मकान में छानबीन की और ड्रम को कारीगर से कटवाया, तो अंदर सीमेंट में जमे सौरभ के शव के टुकड़े बरामद हुए। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में अब अदालत के फैसले पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
- ‘नीला ड्रम केस’ मुख्य रूप से मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में हुए सौरभ हत्याकांड से जुड़ा है।
- इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी के रूप में मृतक सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया गया है।
- अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल 22 गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए गए हैं।
- आरोपियों ने शव को छिपाने के लिए 1200 लीटर के नीले प्लास्टिक ड्रम में शव के टुकड़े रखकर ऊपर से सीमेंट और बालू भर दी थी।
- सौरभ लंदन में काम करता था और वह फरवरी 2025 में मेरठ आया था, जिसकी 3 मार्च 2025 की रात हत्या कर दी गई थी।



