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कलिंगा विश्वविद्यालय ने “सामान्य बीमारियों के लिए घरेलू उपचार की तैयारी” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया

रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय द्वारा जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) विभाग और योग विभाग के सहयोग से विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में “सामान्य बीमारियों के लिए घरेलू उपचार की तैयारी” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। बायोविजन (BioVision) और कैंपस ऑन (Campus On) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में कलिंगा विश्वविद्यालय और माता […]

कलिंगा विश्वविद्यालय ने “सामान्य बीमारियों के लिए घरेलू उपचार की तैयारी” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय द्वारा जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) विभाग और योग विभाग के सहयोग से विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में “सामान्य बीमारियों के लिए घरेलू उपचार की तैयारी” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। बायोविजन (BioVision) और कैंपस ऑन (Campus On) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में कलिंगा विश्वविद्यालय और माता कर्मा कॉलेज, महासमुंद के 200 से अधिक विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सरल, आसानी से उपलब्ध और किफायती प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करके पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था। घरेलू उपचारों के जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए, इस सत्र में बुनियादी तैयारी तकनीकों, उचित स्वच्छता और घरेलू समाधानों की वैज्ञानिक सीमाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप रही, जिनमें SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण), SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) शामिल हैं।

उद्घाटन समारोह में प्रमुख अकादमिक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए, जिनमें शामिल थे

• डॉ. मोनिका सेठी शर्मा, प्रति-कुलपति, कलिंगा विश्वविद्यालय
• डॉ. बेंदी अंजनेयुलु, उप डीन- अकादमिक मामलें एवं प्रभारी डीन- विज्ञान संकाय, कलिंगा विश्वविद्यालय
• डॉ. सुषमा दुबे, विभागाध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, कलिंगा विश्वविद्यालय (कार्यक्रम समन्वयक)
कलिंगा विश्वविद्यालय के योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार मानिक मुख्य विषय-विशेषज्ञ (रिसोर्स पर्सन) थे। उन्होंने पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों पर व्यावहारिक अंतर्दृष्टि साझा की और सामान्य प्राकृतिक सामग्रियों की उचित तैयारी एवं उनके उपयोग का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ हुआ, जिसके बाद समापन भाषण में डॉ. मोनिका सेठी शर्मा और डॉ बेंदी अंजनेयुलु ने अंतर-विषयक अध्ययन के महत्व और पारंपरिक उपचारों के प्रति एक वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण बनाए रखने पर बल दिया।

कार्यक्रम आयोजकों ने कहा की इस तरह की अंतर-विषयक पहल छात्रों को जैव प्रौद्योगिकी, पारंपरिक स्वास्थ्य और टिकाऊ जीवन शैली को आपस में जोड़ने का अवसर देती है, साथ ही यह वैज्ञानिक रूप से जिम्मेदार स्वास्थ्य पद्धतियों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती है।

डॉ. सुषमा दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने नेतृत्व, अतिथि संकाय सदस्यों और माता कर्मा गर्ल्स कॉलेज की 50 से अधिक छात्राओं सहित सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया, जिनके योगदान से यह कार्यशाला सफल रही।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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