खाद्य मंत्री ने जशपुर के फ़ूड ऑफिसर को किया निलंबित, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई नहीं करने का आरोप

खाद्य मंत्री ने जशपुर के फ़ूड ऑफिसर को किया निलंबित, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई नहीं करने का आरोप
खाद्य मंत्री ने जशपुर के फ़ूड ऑफिसर को किया निलंबित, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई नहीं करने का आरोप

रायपुर। जशपुर जिले के प्रभारी खाद्य अधिकारी घनश्याम सिंह कंवर को नियमों और निर्देशों की बार बार अनदेखी महंगी पड़ी। उन्हें बार-बार अनदेखा करते हुए पीडीएस के तहत खाद्यान्न वितरण में लापरवाही करने पर निलंबित किया गया है। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत के निर्देश पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।

जशपुर जिले के प्रभारी खाद्य अधिकारी घनश्याम सिंह कंवर पर आरोप है कि उनके द्वारा कोविड-19 महामारी संक्रमण के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए शासन की ओर से लिए गए निर्णय व कार्यों के प्रति उदासीनता बरती गई। पूर्व में भी इनके विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके संबंध में मौखिक रूप से उनको चेतावनी भी दी गई थी। लापरवाही की बार-बार पुनरावृत्ति होने से शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाने में असुविधा हो रही थी।

क्या है पूरा मामला..?

जशपुर जिले के ग्राम पंचायत कांसाबेल के शासकीय उचित मूल्य की दुकान गंझूटोली के संचालक नव उदय स्व सहायता समूह की अध्यक्ष उषा थवाईत के द्वारा माह मई जून 2021 के खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी किये जाने के फलस्वरूप इस दुकान को निलंबित करने का आदेश जशपुर कलेक्टर ने जारी किया और समूह संचालक के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश खाद्य विभाग को दिया, मगर एक पखवाड़े बाद भी यह कार्रवाई नहीं की गई।

मामला संज्ञान में आने पर नाराज हुए मंत्री

इस तरह की शिकायत खाद्यमंत्री अमरजीत भगत के संज्ञान में आईं तो उन्होंने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उनका कहना है कि समस्त पीडीएस दुकानों का समय-समय पर निरीक्षण व राशन वितरण कार्य सुचारू रूप से हो सके, इसकी जिम्मेदारी भी खाद्य अधिकारी की होती है। इस जिम्मेदारी से चूकने पर अधिकारियों को परिणाम भी भुगतने पड़ेंगे, क्योंकि इसका सीधा असर गरीबों की थाली पर पड़ता है।

गौरतलब है कि उपरोक्त मामले को लेकर कांसाबेल के हितग्राहियों में बहुत रोष था। इस मामले में घनश्याम सिंह कंवर, खाद्य अधिकारी, जिला-जशपुर के खिलाफ शिकायत की जांच में पाया गया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 की कंडिका-3 का उल्लंघन किया गया है। इस आधार पर उन्हें राज्य शासन की ओर से छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण,नियंत्रण तथा अपील) नियम-1966 के नियम-9 के तहत निलंबित किया गया।

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