Gen-z Protest: नेपाल और भारत के बाद अब Gen-Z का प्रोटेस्ट फ्रांस की सड़कों पर देखने को मिल रहा है। फ्रांस में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और शिक्षा व्यवस्था का जमकर विरोध जताया जा रहा है। कई जगह छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई।
दरअसल, फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर युवाओं का प्रदर्शन चल रहा है। यह प्रदर्शन पेरिस के उत्तरी हिस्से से शुरू हुआ। विरोध अब देश के कई हिस्सों तक फैल गया है। पिछले एक हफ्ते में करीब 400 स्कूल बंद रहे। छात्रों का आरोप है कि स्कूलों में भीड़ बढ़ रही है, इमारतें जर्जर हैं और शिक्षकों की कमी है। आंदोलन अब हिंसक हो चुका है। लेंस शहर के पास एक घटना में एक छात्र का हाथ फ्रैक्चर होने की खबर है। एक 14 वर्षीय छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला गिरने की बात सामने आई है। उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर हुआ और सर्जरी करनी पड़ी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लेंस में एक छात्र ने कथित तौर पर ग्रेनेड उठाते समय अपना हाथ खो दिया, जबकि टूर्स में एक अन्य छात्र की एक आंख की रोशनी चली गई।
मंत्री ने इसे‘हिंसक अल्पसंख्यक’ बताया
करीब 400 स्कूल बंद रहे और कई जगह हिंसा हुई। फ्रांस के न्याय मंत्रालय के अनुसार, 5,060 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 87 प्रतिशत नाबालिग हैं। फ्रांस के शिक्षा मंत्री ने हिंसा को ‘हिंसक अल्पसंख्यकों’ का काम बताया है। सरकार का आरोप है कि आंदोलन की शुरुआत हार्ड-लेफ्ट नेताओं ने की। हालांकि, LFI सांसद लुई बोयार्ड ने इस आरोप से इनकार किया है।
एक स्कूल से शुरू हुआ प्रदर्शन पूरे देश में फैला
पेरिस के उत्तर में स्थित एक उपनगरीय हाई स्कूल में हड़ताली शिक्षकों के समर्थन में प्रदर्शन शुरू हुआ था। छात्रों और शिक्षकों की शिकायत कर्मचारियों और संसाधनों की कमी को लेकर थी। 21 सितंबर को पेरिस के सेंट-एक्सुपरी हाई स्कूल में शुरुआती विरोध हुआ। छात्रों ने अपने शिक्षकों के साथ मिलकर स्कूल में कर्मचारियों और संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाया। उनकी मांगें मान ली गईं और स्कूल में अतिरिक्त कर्मचारी भेजे गए। इसके बाद हड़ताल खत्म हो गई। लेकिन दूसरे स्कूलों के छात्रों ने भी यही मांगें उठानी शुरू कर दीं। देखते ही देखते प्रदर्शन पेरिस से निकलकर देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गया।
स्कूलों के गेट बंद किए, बैरिकेड लगाए
प्रदर्शन के दौरान पेरिस और आसपास के इलाकों के हाई स्कूलों के छात्रों ने स्कूलों के गेट बंद करने शुरू कर दिए। कुछ ही दिनों में यह विरोध उत्तर में लिले से लेकर दक्षिण में मार्सिले तक पहुंच गया। कई जगह छात्रों ने कूड़ेदानों में आग लगाई और बैरिकेड लगाए। शिक्षकों पर हमले और पुलिस के साथ झड़प की तस्वीरें भी सामने आईं। विरोध शुरू होने के बाद से 100 से अधिक हाई स्कूलों को नुकसान पहुंचा है। आलोचकों ने पुलिस पर अत्यधिक सख्ती बरतने का आरोप लगाया है। प्रदर्शन में छात्र, शिक्षक और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
पुरानी शिकायतें अब आंदोलन की वजह
हिंसा और प्रदर्शन की रफ्तार ने कई लोगों को चौंकाया है। हालांकि, छात्रों की शिकायतें पुरानी हैं। उनका मुद्दा स्कूलों में भीड़, अपर्याप्त सुविधाओं और कर्मचारियों की कमी से जुड़ा है। कई सालों से ऐसे वीडियो सामने आते रहे हैं, जिनमें कक्षाओं में पर्याप्त डेस्क या कुर्सियां नहीं होने की बात दिखाई गई है। कई बार शिक्षक के अनुपस्थित होने पर उसकी जगह दूसरे शिक्षक की व्यवस्था नहीं हो पाती। ऐसे में छात्रों की कक्षाएं रद्द करनी पड़ती हैं।
कई मोर्चों पर सरकार के सामने चुनौती
फ्रांस की सरकार के सामने सिर्फ छात्रों का प्रदर्शन चुनौती नहीं है। देश महंगाई से भी जूझ रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस पर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज है। सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर बढ़ने से कर्ज संभालने की लागत भी बढ़ रही है। फ्रांस की आबादी बूढ़ी होने के साथ पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रक्षा खर्च भी बढ़ाया गया है। देश में विरोध का दायरा स्कूलों तक सीमित नहीं है। सरकारी कर्मचारी, फायरफाइटर, स्वास्थ्यकर्मी और मछुआरे भी अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।



