Twin Ganesha statues carved from a single stone at Barsur in Dantewada, Chhattisgarh

Twin Ganesha Statue Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित बारसूर गांव को देवनगरी कहा जाता है। दंतेवाड़ा मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर इस गांव में एक ही स्थान पर 147 प्राचीन मंदिर होने की बात कही जाती है।

इन मंदिरों में भगवान शिव, भगवान विष्णु और माता पार्वती की प्राचीन प्रतिमाएं स्थापित हैं। इसी बारसूर में भगवान गणेश की जुड़वा प्रतिमाएं भी हैं, जिन्हें दुनिया की तीसरी बड़ी गणेश प्रतिमा माना जाता है।

एक पत्थर में बनी हैं गणेश की दो प्रतिमाएं

बारसूर के गणेश मंदिर में दो विशाल गणेश प्रतिमाएं एक ही पत्थर से बनाई गई हैं। ये प्रतिमाएं 11वीं शताब्दी की बताई जाती हैं। खास बात यह है कि दोनों प्रतिमाओं को अलग-अलग पत्थरों से नहीं, बल्कि एक ही चट्टान से तराशा गया है। मंदिर में एक गणेश प्रतिमा की ऊंचाई साढ़े 7 फीट और दूसरी की ऊंचाई साढ़े 5 फीट बताई गई है। दोनों प्रतिमाएं मोनोलिथिक हैं। यानी इन्हें एक ही चट्टान को तराशकर बनाया गया है। इसमें अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर प्रतिमा तैयार नहीं की गई।

क्यों कहा जाता है बारसूर को देवनगरी?

बारसूर को देवनगरी कहे जाने के पीछे यहां मौजूद प्राचीन मंदिर और तालाब प्रमुख वजह बताए जाते हैं। रियासत काल में यहां 147 तालाब और 147 मंदिर हुआ करते थे। इनमें से कई मंदिर आज भी मौजूद हैं। इन ऐतिहासिक मंदिरों का संरक्षण और संवर्धन पुरातत्व विभाग की ओर से किया गया है। इन्हीं संरक्षित मंदिरों में भगवान गणेश का यह मंदिर भी शामिल है।

जुड़वा गणेश प्रतिमा बनी आकर्षण

एक ही मंदिर में गणेश की दो प्रतिमाओं का होना बारसूर की खास पहचान है। इन प्रतिमाओं को देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग पहुंचते हैं। विदेशों से भी पर्यटकों के यहां आने की बात कही जाती है।इन प्रतिमाओं को हजार साल पुराना बताया जाता है। साथ ही, इन्हें एक ही पत्थर में बनी जुड़वा गणेश प्रतिमाओं में विशेष माना जाता है।

राजा बाणासुर से जुड़ी है कहानी

बारसूर के इन मंदिरों के पीछे 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक कहानी भी बताई जाती है। उस समय बस्तर में छिंदक नागवंशी राजाओं का शासन था। बताया जाता है कि बारसूर के राजा बाणासुर ने यहां मंदिर का निर्माण कराया था। गणेश मंदिर के निर्माण को लेकर भी एक कथा प्रचलित है। इसके अनुसार राजा बाणासुर की बेटी उषा और उनके मंत्री कुभांडु की बेटी चित्रलेखा जिगरी सहेलियां थीं। दोनों भगवान गणेश की परमभक्त थीं।बताया जाता है कि राजा बाणासुर ने दोनों के लिए एक ही पत्थर में गणेश की दो विशाल प्रतिमाओं का निर्माण कराया था। उषा और चित्रलेखा रोज यहां पूजा-पाठ के लिए आती थीं।बारसूर की जुड़वा गणेश प्रतिमाएं आज भी इस प्राचीन देवनगरी की पहचान बनी हुई हैं। एक ही पत्थर से बनी इन दोनों प्रतिमाओं को देखने के लिए लोग यहां पहुंचते हैं।

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