Chhattisgarh Arsa recipe: छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पकवानों में अरसा की खास पहचान है। चावल और गुड़ से बनने वाली यह मिठाई अपने अनोखे स्वाद के कारण तीज-त्योहारों के मौके पर हर घर की पसंद बनती है। रक्षाबंधन, होली, दीपावली और खासकर तीज पर्व पर इसकी मांग काफी बढ़ जाती है।
यह पकवान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक मिठास को जीवंत रखता है। सही तरीके से बनाए जाने पर यह मिठाई 10 से 15 दिनों तक खराब नहीं होती है।
चावल से शुरू होती है अरसा बनाने की तैयारी
अरसा बनाने के लिए सबसे पहले चावल को करीब 3 घंटे तक पानी में भिगोकर रखा जाता है। इसके बाद चावल को पानी से निकालकर अच्छी तरह सुखाया जाता है। चावल सूखने के बाद इसे दरदरा पीस लिया जाता है। इसके बाद कढ़ाई में गुड़ डालकर उसका पाक तैयार किया जाता है। एक किलो चावल से अरसा बनाने के लिए करीब आधा किलो गुड़ की जरूरत पड़ती है।
गुड़ के पाक में मिलाया जाता है पिसा चावल
गुड़ का पाक तैयार होने के बाद इसमें दरदरा पिसा हुआ चावल डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है। मिश्रण तैयार होने पर इसके छोटे-छोटे आकार के अरसे बनाए जाते हैं। अब इन्हें गर्म तेल में डालकर करीब 5 मिनट तक पकाया जाता है। इस तरह चावल और गुड़ से पारंपरिक अरसा तैयार हो जाता है।
सौंफ और तिल से बढ़ता है स्वाद
अरसे का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए इसमें सौंफ और तिल भी मिलाए जा सकते हैं। इससे इस पारंपरिक मिठाई का स्वाद और बेहतर हो जाता है। सही तरीके से तैयार करने और सुरक्षित रखने पर अरसा करीब 10 से 15 दिनों तक खराब नहीं होता।
छत्तीसगढ़ी संस्कृति और त्योहारों की मिठास
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी परिवारों में अरसा सिर्फ एक पकवान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। त्योहारों के दिनों में महिलाएं मिलकर इसे पारंपरिक तरीकों से बनाती हैं। लंबी शेल्फ लाइफ होने के कारण इसे पर्वों के दौरान आसानी से स्टोर किया जा सकता है। यह छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों की सूची में अपनी अनूठी मिठास के लिए हमेशा से खास रहा है।



