Monsoon Health Tips: मानसून की बारिश गर्मी से राहत देती है, लेकिन घर में बढ़ती नमी और सीलन स्वास्थ्य के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। दीवारों पर काले या हरे धब्बे, पेंट का उखड़ना, बदबू और लंबे समय तक गीली रहने वाली जगहों पर फफूंद और दूसरे सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं।
ऐसे वातावरण में रहने से सांस संबंधी लक्षण, एलर्जी और अस्थमा की समस्या बढ़ सकती है। मानसून में खासतौर पर इन स्वास्थ्य समस्याओं से सावधान रहने की जरूरत है।
एलर्जी और एलर्जिक राइनाइटिस
सीलन वाली जगहों पर पनपने वाली फफूंद के कण हवा में फैल सकते हैं। इनके संपर्क में आने पर छींक, नाक बंद या बहना, आंखों में खुजली और पानी आने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से मोल्ड एलर्जी है, उनमें ये लक्षण ज्यादा परेशान कर सकते हैं।
अस्थमा की समस्या
घर में मौजूद नमी और फफूंद अस्थमा के मरीजों के लिए ट्रिगर बन सकती है। इससे खांसी, घरघराहट और सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है। फफूंद को सांस के साथ अंदर लेने से एलर्जी नहीं होने वाले लोगों में भी अस्थमा अटैक ट्रिगर हो सकता है।
सांस की समस्या और संक्रमण
लगातार नम वातावरण में रहने से सांस संबंधी लक्षण और कुछ श्वसन संक्रमणों का जोखिम बढ़ सकता है। नम या फफूंद वाले भवनों में रहने और श्वसन संबंधी समस्याओं के बीच संबंध पाया गया है। बच्चों और पहले से सांस की बीमारी वाले लोगों को ऐसे वातावरण में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ब्रोंकाइटिस और लगातार खांसी
सीलन और फफूंद से निकलने वाले एलर्जेन और जलन पैदा करने वाले कण नाक, गले और फेफड़ों में irritation पैदा कर सकते हैं। इससे लंबे समय तक खांसी, गले में खराश या सांस लेने में असहजता महसूस हो सकती है। नम इमारतों में रहने वाले लोगों में ब्रोंकाइटिस और श्वसन संबंधी लक्षणों की रिपोर्ट अधिक होने की बात कही गई है।
त्वचा संबंधी परेशानी
सीलन भरे वातावरण में फफूंद के संपर्क से कुछ लोगों को त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते या irritation की समस्या हो सकती है। संवेदनशील त्वचा या एलर्जी वाले लोगों को ऐसे वातावरण में परेशानी अधिक महसूस हो सकती है।
घर को सीलन से कैसे बचाएं?
मानसून में घर की दीवारों, छत, खिड़कियों और पाइपलाइन से होने वाले लीकेज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जहां संभव हो, घर में पर्याप्त ventilation रखें और गीली चीजों को जल्द सुखाएं। घर के अंदर humidity को 50% से कम रखने की सलाह दी जाती है। जरूरत पड़ने पर dehumidifier या एयर कंडीशनर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अगर दीवार या फर्नीचर पर फफूंद दिखाई दे या लगातार सीलन की बदबू आए तो केवल उसे ढकना पर्याप्त नहीं है। नमी के स्रोत को खत्म करना जरूरी है। बड़ी मात्रा में फफूंद हो या घर में किसी को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो, तो विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर है।
मानसून में घर की नमी पर भी रखें नजर
बारिश के मौसम में घर की सफाई के साथ उसकी नमी पर नजर रखना भी जरूरी है। छोटी दिखने वाली सीलन को समय रहते ठीक करना परिवार को कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है।


