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Madhya Pradesh

30 से ज्यादा बच्चों की मौत, 4 गांवों में 1,149 मरीज; बालाघाट में क्या हो रहा है?

Baiga tribal children receiving treatment at a hospital in Balaghat Madhya Pradesh
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Balaghat Baiga Children Death: आदिवासी बहुल बालाघाट जिले में बैगा बच्चों की मौत का मामला लगातार गंभीर बना हुआ है। पिछले कुछ महीनों में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की रिपोर्ट सामने आई है। प्रभावित गांवों में बीमारी के मामले भी सामने आ रहे हैं।

कुंडेकासा, अडोरी, कोरका और बांडरी में 10 सितंबर तक हुए घर-घर स्वास्थ्य सर्वे में 6,342 लोगों की जांच की गई। इनमें 1,149 मरीज मिले। 486 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बच्चों में कुपोषण के आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ाई है।

घर-घर पहुंची स्वास्थ्य टीम, 6 हजार से ज्यादा लोगों की जांच

प्रभावित चार गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घर-घर जाकर लोगों की जांच की। 10 सितंबर तक 6,342 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जांच में 1,149 मरीज सामने आए। इन मरीजों में मलेरिया, दस्त, चकत्ते के साथ बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों के मामले मिले। 663 मरीजों का इलाज घर पर किया गया। वहीं 486 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 446 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 40 का इलाज अभी जारी है।

जिला अस्पताल में बढ़े बच्चों के मरीज

बीमारी का असर जिला अस्पताल में भी दिखाई दिया। सितंबर की शुरुआत में बालाघाट जिला अस्पताल में रोजाना करीब 20 से 25 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे थे। मरीज बढ़ने पर बच्चों के वार्ड की क्षमता 50 से बढ़ाकर 150 बिस्तर करनी पड़ी। करीब डेढ़ महीने में लगभग 400 बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने की रिपोर्ट सामने आई थी। बच्चों में बुखार, चकत्ते और संक्रमण के लक्षण बताए गए हैं। मलेरिया और खसरा जैसी बीमारियों को लेकर भी जांच की गई और चिंता जताई गई।

1.21 लाख बच्चों की जांच, कुपोषण भी बड़ी चुनौती

बालाघाट में बच्चों की स्वास्थ्य जांच के आंकड़े भी सामने आए हैं। करीब 1,21,892 बच्चों की जांच में 3,741 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए। 15,588 बच्चों में मध्यम स्तर का कुपोषण दर्ज किया गया। 8,587 बच्चे गंभीर रूप से कम वजन वाले मिले। बीमारी के साथ इन आंकड़ों ने प्रभावित आदिवासी इलाकों में बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ाई है।

जंगल और दूरदराज बस्तियों में इलाज तक पहुंच चुनौती

बालाघाट के प्रभावित गांवों का बड़ा हिस्सा दूर-दराज और जंगल वाले इलाकों में है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना और समय पर इलाज मिलना चुनौती बना हुआ है। रिपोर्टों में कुछ बस्तियों तक सड़क और एंबुलेंस पहुंचने में परेशानी का भी उल्लेख है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल, जांच की मांग

बच्चों की मौत का मामला अब राजनीतिक स्तर पर भी उठाया जा रहा है। कांग्रेस के आदिवासी प्रकोष्ठ के चेयरमैन डॉ. विक्रांत भूरिया ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। भूरिया ने बच्चों की मौत से जुड़े वास्तविक आंकड़ों और हालात को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी प्रभावित इलाकों में पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।

सरकार ने 67 मेडिकल ऑफिसर तैनात करने की बात कही

बच्चों की मौत के बाद सरकार ने बालाघाट में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने के कदमों की जानकारी दी है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के निर्देश दिए। जिले में 67 नए मेडिकल ऑफिसर तैनात करने, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 2 करोड़ रुपये मंजूर करने और दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एक सब-हेल्थ सेंटर तथा दो मोबाइल मेडिकल यूनिट स्थापित करने की बात कही गई है।

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

बैगा बच्चों की मौत का मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी पहुंच गया है। जनहित याचिका में बच्चों की मौत और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चिंता जताई गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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