अनूपपुर/शहडोल। अनूपपुर-शहडोल सीमा पर बीते 10 दिनों से आतंक का पर्याय बना बिगड़ैल हाथी आखिरकार काबू में आ गया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की 60 सदस्यीय रेस्क्यू टीम ने चार हाथियों की मदद से चार दिन चले ऑपरेशन के बाद शनिवार को उत्पाती हाथी को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया। अब इस हाथी को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में रखा जाएगा।

4 लोगों और 8 मवेशियों को मार चुका है यह हाथी

यह खतरनाक हाथी 2 अप्रैल की रात छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल से एमपी के अनूपपुर जिले में दाखिल हुआ था। जैतहरी और अनूपपुर इलाके में विचरण करते हुए इस हाथी ने छत्तीसगढ़, अनूपपुर और शहडोल में अब तक 4 लोगों और 8 पालतू मवेशियों को कुचलकर मार डाला। तीन लोग और एक मवेशी गंभीर रूप से घायल भी हुए।

पिछले 10 दिनों से यह हाथी शहडोल जिले के अमलाई थाना क्षेत्र और केशवाही रेंज की रामपुर बीट के बैरिहा-बेलिया जंगल में घूम रहा था। हाथी लगातार घरों, खेतों और फसलों को नुकसान पहुंचा रहा था। दहशत के कारण ग्रामीण रातभर जागकर पहरा दे रहे थे।

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CM के निर्देश पर चला रेस्क्यू ऑपरेशन

जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के दबाव के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर बांधवगढ़ से चार प्रशिक्षित हाथियों के साथ 60 सदस्यीय रेस्क्यू दल भेजा गया। टीम ने जंगल में कैंप बनाकर चार दिन तक ऑपरेशन चलाया।

होश में आने पर भागा हाथी

हाथी को ट्रैंकुलाइज कर पिंजरे में डाला गया, लेकिन होश आते ही वह आक्रोशित हो गया। हाथी ने पिंजरा और पैरों की जंजीर तोड़ दी और करीब 1 किमी तक जंगल में भाग गया। रेस्क्यू दल ने दोबारा उसे काबू में किया। टूटे पिंजरे की मरम्मत के बाद शनिवार सुबह फिर से रेस्क्यू शुरू हुआ और आखिरकार हाथी को बांधवगढ़ के लिए रवाना कर दिया गया।

उत्पाती हाथी के पकड़े जाने से अनूपपुर और शहडोल के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

4 हाथियों का दल अब छत्तीसगढ़ में वहीं, हाथियों का एक दूसरा दल जो चार महीने से अनूपपुर में शांति से विचरण कर रहा था, वह 5 दिन पहले जैतहरी से निकलकर छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल के घुसरिया बीट के जंगल में चला गया है। फिलहाल चारों हाथी दिन में लेगरा डोंगरी पहाड़ पर रहते हैं और रात में घुसरिया, मजीत टोला, पटेल टोला, सोननदी के पास कुम्हारी इलाके में घूम रहे हैं। यह इलाका अनूपपुर के चोलना-धनगवा जंगल से 12 से 15 किमी दूर है। खबर लिखे जाने तक हाथी जंगल से बाहर नहीं निकले थे।

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