अमरावती के डोमा आदिवासी आश्रमशाला हॉस्टल की खबर दर्शाता थंबनेल, जिसमें छात्राओं के डरने, घुंघरुओं की आवाज और कथित भूत की कहानी के साथ हॉस्टल से लौटते छात्र दिखाई दे रहे हैं।
अमरावती के आदिवासी हॉस्टल में भूत का खौफ! घुंघरुओं की आवाज और छात्राओं के अचानक हंसने-रोने से बढ़ा डर।

Amravati Ghost Hostel News: महाराष्ट्र के अमरावती से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। चिखलदरा तहसील के डोमा स्थित आदिवासी आश्रमशाला में उस वक्त डर का माहौल बन गया, जब हॉस्टल की 16 छात्राएं अचानक हंसने और फिर रोने लगीं। कुछ छात्राओं ने घुंघरुओं जैसी आवाजें सुनाई देने का भी दावा किया। घटना के बाद पूरे इलाके में भूतबाधा की अफवाह फैल गई और देखते ही देखते करीब 600 विद्यार्थी हॉस्टल छोड़कर अपने-अपने घर चले गए।

करीब 7 से 8 दिन पहले आश्रमशाला की 16 छात्राओं के व्यवहार में अचानक बदलाव देखा गया। छात्राएं कभी जोर-जोर से हंसने लगीं तो कुछ देर बाद रोने लगीं। घटना की जानकारी छात्रावास की अधीक्षिका उज्ज्वला इंगले को मिली। उन्होंने मामले की सूचना स्कूल के मुख्याध्यापक को दी। लेकिन अगले ही दिन यह बात पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद छात्राओं पर भूतबाधा होने की अफवाह ने जोर पकड़ लिया। हॉस्टल में रहने वाले दूसरे विद्यार्थी भी डर गए और बड़ी संख्या में छात्रों ने वहां रहना छोड़ दिया।

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मोह के पेड़ की कहानी ने बढ़ाया डर
इस पूरे मामले के पीछे गांव में एक पुरानी कहानी भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि आश्रमशाला परिसर में पहले एक मोह का पेड़ था, जिसे बाद में काट दिया गया। इसके बाद अफवाह फैली कि पेड़ से जुड़ा कोई भूत परिसर में घूमता है। कुछ छात्राओं का कहना है कि करीब एक साल पहले भूत की फिल्म देखने के बाद से हॉस्टल में ऐसी घटनाओं की चर्चा शुरू हुई थी। हालांकि, गांव के सरपंच सुनील उईके ने भी साफ किया कि पेड़ और भूत से जुड़ी बातों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

कुछ दिन पहले नाग के डसने से 3 छात्राओं की मौत
इस घटना ने इसलिए भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि कुछ दिन पहले अमरावती की ही एक आदिवासी आश्रमशाला में 6 छात्राओं को करैत नाग ने डस लिया था, जिनमें से 3 छात्राओं की मौत हो गई थी। ऐसे में पहले से डरे हुए विद्यार्थियों के बीच नई अफवाह ने भय को और बढ़ा दिया।

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प्रशासन ने क्या कहा ?
प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। डोमा गांव के सरपंच सुनील उईके ने स्पष्ट किया कि मोहा के पेड़ या किसी भूत-प्रेत का इस घटना से कोई तथ्यात्मक संबंध नहीं है, यह केवल बच्चों का मानसिक डर और अंधविश्वास है। वहीं स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम अब आश्रमशाला का दौरा करने और बच्चों का मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) कराने की योजना बना रही है। डॉक्टरों के अनुसार, यह मामला सामूहिक हिस्टीरिया (Mass Hysteria) का हो सकता है, जो अक्सर बच्चों में तनाव या डर के कारण फैलता है।

शिक्षा पर पड़ रहा असर
अचानक 600 विद्यार्थियों के हॉस्टल छोड़कर चले जाने से आश्रमशाला में पठन-पाठन का कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है। आदिवासी बहुल इलाकों में संचालित इन आवासीय स्कूलों की सुरक्षा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते बच्चों का डर दूर नहीं किया गया, तो उनकी पढ़ाई का लंबा नुकसान हो सकता है। साथ ही, दूर-दराज के इलाकों में अंधविश्वास के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की भ्रामक स्थितियों से बचा जा सके।

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नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।