Major action against petrol adulteration: भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश के खुदरा ईंधन नेटवर्क में मिलावट और गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए एक बड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। सख्त कार्रवाई के तहत 25 अगस्त 2026 तक 2573 गैर-अनुपालन वाले पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री रोक दी गई है। यह देश में पिछले कई सालों में पब्लिक सेक्टर पंपों पर हुई सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
ऑटोकार इंडिया और मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस क्वॉलिटी कंट्रोल ड्राइव में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने कार्रवाई की है।
- IOCL (इंडियन ऑयल): सबसे ज्यादा 1257 पंपों पर बिक्री रोकी गई
- HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम): 915 पंप
- BPCL (भारत पेट्रोलियम): 401 पंप
भूमिगत टैंकों की टेस्टिंग अनिवार्य
सप्लाई चेन से पानी और अशुद्धियों को हटाने के लिए अब भूमिगत टैंकों की वाटर-इन्ग्रेस टेस्टिंग दिन में 8 से 12 बार अनिवार्य कर दी गई है, जो देशभर के लगभग 88,995 डीलरों के यहां लागू है। इसके साथ ही 84,687 फ्यूल स्टेशनों का ऑडिट और 85,649 आउटलेट्स पर ऑटोमेशन सिस्टम से निगरानी की जा रही है।
क्लोराइड और पानी की मिलावट का खुलासा कैसे हुआ?
यह पूरा विवाद 28 जुलाई को सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के एक लेटर से शुरू हुआ। SIAM ने पेट्रोलियम सचिव को लिखे पत्र में चेतावनी दी थी कि E20 फ्यूल में ज्यादा क्लोराइड के कारण गाड़ियों के फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप और EGR वाल्व में “भारी बढ़ोतरी” के साथ खराबी आ रही है। SIAM के अनुसार गाड़ियों की टंकी से लिए गए सैंपल में क्लोराइड का स्तर 500 mg/kg तक और रिटेल आउटलेट पर 350 mg/kg तक पाया गया, जबकि सरकार की तय सीमा 3 ppm है।
हालांकि SIAM ने बाद में यह कहते हुए अपना पत्र वापस ले लिया था कि कुछ आंकड़ों को “और वेरिफिकेशन की जरूरत है”, लेकिन रॉयटर्स की जांच और कार कंपनियों की इंटरनल टेस्टिंग रिपोर्ट लीक होने के बाद मामला गरमा गया।
सरकार और OMCs का क्या कहना है?
पेट्रोलियम मंत्रालय और OMCs ने दावा किया है कि उनकी अपनी जांच में बड़े पैमाने पर मिलावट नहीं मिली। मंत्रालय के अनुसार 80 इथेनॉल डिस्टिलरी और 80 से ज्यादा ऑयल टर्मिनल से लिए गए सैंपल में क्लोराइड 3 ppm से नीचे मिला। शुरुआती 160 रिटेल सैंपल में भी क्लोराइड 0 से 3 ppm के बीच था। शुरुआत में सिर्फ 2 से 4 मामलों में ही ज्यादा क्लोराइड मिला था, जिन पर तुरंत बिक्री रोक दी गई थी।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कहा था कि 1,07,000 पंपों के नेटवर्क में 4 मामले मिलने को सिस्टमिक समस्या नहीं कहा जा सकता। लेकिन उपभोक्ताओं की शिकायतों और कंज्यूमर कोर्ट के सख्त रुख के बाद सरकार ने अब 2573 पंपों पर ताले लगाकर यह साफ कर दिया है कि रिटेल फ्यूल क्वालिटी अब सिर्फ आश्वासन का नहीं, बल्कि सख्त प्रवर्तन का मुद्दा है।
इथेनॉल को दोषी मानते हैं पंप संचालक
पेट्रोल में पानी के मिलावट की जो बात सामने आ रही है उसके लिए पेट्रोल पंप संचालक इथेनॉल को दोषी मानते हैं। पेट्रोल पंप संचालकों के संगठन के एक पदाधिकारी ने TRP न्यूज से बातचीत में कहा कि जब से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर बेचे जाने की शुरुआत हुई तब से ही यह समस्या प्रारम्भ हुई है। उनके मुताबिक इथेनॉल के चलते नमी आती है और फिर वह पानी में परिवर्तित हो जाता है। इसके लिए पेट्रोल पम्पों को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करना गलत है। उन्होंने यह भी बताया कि बीते कुछ समय में मिलावट के मामले में छत्तीसगढ़ में कुछ ही पंपों के खिलाफ कार्रवाई किये जानकारी सामने आयी है ,
FAQ: पेट्रोल पंपों में मिलावट
सवाल 1. देशभर में कितने पेट्रोल पंपों पर बिक्री रोकी गई है?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 25 अगस्त 2026 तक 2573 पेट्रोल पंपों पर बिक्री रोक दी है, जो तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे थे।
सवाल 2. किस कंपनी के सबसे ज्यादा पंप बंद हुए हैं?
IOCL के सबसे ज्यादा 1257 पंप, HPCL के 915 पंप और BPCL के 401 पंपों पर कार्रवाई हुई है।
सवाल 3. पेट्रोल पंप बंद करने की वजह क्या है?
E20 पेट्रोल में क्लोराइड और पानी की मिलावट की शिकायतें मिली थीं, जिससे गाड़ियों के इंजन और फ्यूल इंजेक्टर खराब होने का खतरा था। SIAM की शिकायत के बाद सरकार ने क्वालिटी-कंट्रोल ड्राइव शुरू की।
सवाल 4. क्या E20 पेट्रोल ही खराब है?
नहीं, सरकार का कहना है कि टर्मिनल से निकलने वाला E20 मानकों पर सही है, लेकिन रिटेल लेवल पर भंडारण और हैंडलिंग में पानी और क्लोराइड की मिलावट की समस्या सामने आई है, जिस पर अब रोज 8-12 बार टेस्टिंग की जा रही है।


