CDSCO drug quality test report showing failed medicine samples
CDSCO drug quality test report showing failed medicine samples

CDSCO Drug Quality Test: देश में मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। देश की सर्वोच्च दवा नियामक संस्था सीडीएससीओ की गुणवत्ता जांच में 199 दवाओं के नमूने फेल पाए गए हैं। इनमें पेट, दिल, एंटीबायोटिक्स और बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं।

जांच में कई दवाओं में बीमारी से लड़ने वाला मुख्य एक्टिव साल्ट तय मात्रा से काफी कम मिला। सबसे गंभीर मामला पेट की एक दवा का सामने आया, जिसमें रैबेप्राजोल और डोमपेरीडोन की मात्रा 0.0 मिलीग्राम पाई गई। वहीं दिल के मरीजों को दी जाने वाली क्लोपिडोग्रेल और एस्पिरिन की संयुक्त गोली में भी दोनों दवाओं की मात्रा तय मानक से काफी कम मिली।

पेट की दवा में एक्टिव साल्ट शून्य

जांच में कुछ दवाओं के नमूनों में बेहद गंभीर खामियां सामने आईं। समय फार्मा की पेट दर्द और एसिडिटी से जुड़ी आर-जारा डीएसआर कैप्सूल में रैबेप्राजोल और डोमपेरीडोन की मात्रा 0.0 मिलीग्राम पाई गई। र्मारूट्स हेल्थकेयर की क्लोपिडोग्रेल और एस्पिरिन की संयुक्त गोली में भी तय मात्रा के मुकाबले एक्टिव साल्ट काफी कम मिला। इसमें क्लोपिडोग्रेल 38.20 प्रतिशत और एस्पिरिन 21.8 प्रतिशत ही पाया गया। प्रेगाबालिन और रामिप्रिल जैसी अन्य दवाओं के नमूनों में भी निर्धारित मानकों के मुकाबले कम मात्रा में दवा पाई गई।

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ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से लेकर एंटीबायोटिक्स तक पर सवाल

जांच में जैक्सन लेबोरेटरीज का ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन भी फेल पाया गया। यह इंजेक्शन प्रसव के दौरान गर्भाशय के संकुचन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसकी पहचान संबंधी जांच में खामी मिली। पैरासिटामोल की कुछ गोलियों में दवा के ठीक से न घुलने की समस्या सामने आई। बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले पैरासिटामोल सिरप में सूक्ष्मजीव जांच से जुड़ी खामियां मिलीं। इसके अलावा सेफिक्सिम, अमॉक्सिसिलिन और क्लोक्सासिलिन जैसे एंटीबायोटिक्स के नमूने भी गुणवत्ता मानकों पर फेल हुए।

बड़ी कंपनियों के उत्पाद भी सूची में

सीडीएससीओ की सूची में सिर्फ छोटी निर्माण इकाइयों के उत्पाद ही शामिल नहीं हैं। लुपिन, सनोफी इंडिया, जायडस हेल्थकेयर, आईपीका लेबोरेटरीज, मैक्लियोड्स, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन यानी GSK और कैडिला फार्मास्यूटिकल्स जैसी बड़ी कंपनियों के कुछ बैच भी अलग-अलग गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए हैं। जांच में ‘डायबिटिस-ऑल’ नाम का एक पाउडर पूरी तरह नकली घोषित किया गया। इसमें पैकेज पर किए गए दावे के विपरीत पियोग्लिटाजोन मिला।

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बाजार से वापस लेने के निर्देश

गुणवत्ता जांच में फेल हुए विशिष्ट बैच नंबरों को लेकर सीडीएससीओ और राज्य दवा नियंत्रक एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की है। संबंधित बैचों को बाजार से वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। साथ ही उत्पादन प्रक्रिया की जांच शुरू की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, गुणवत्ताहीन दवाओं से इलाज का असर कम हो सकता है। लंबे समय में ऐसी दवाओं के इस्तेमाल से दवाओं के प्रति प्रतिरोध पैदा होने का खतरा भी बताया जाता है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।