प्रमोशन पर आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट राज्यवार करेगा सुनवाई, राज्य सरकारों को अनूठे मुद्दे दो हफ्ते के भीतर दाखिल करने के निर्देश
प्रमोशन पर आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट राज्यवार करेगा सुनवाई, राज्य सरकारों को अनूठे मुद्दे दो हफ्ते के भीतर दाखिल करने के निर्देश

नई दिल्ली। पेगासस मामले में आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। इस दौरान केंद्र ने एफिडेविट दाखिल करने से मना कर दिया। लेकिन वह जासूसी के आरोपों की जांच के लिए पैनल गठित करने के लिए तैयार है।

केंद्र सरकार के इस जवाब से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने पिछली सुनवाई में हलफनामा दाखिल करने का मौका दिया था, पर अब क्या कर सकते हैं आदेश देना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह जानना चाहता है कि आखिर इस मामले में अब तक सरकार ने क्या किया है।

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर उसने इस मामले में एफिडेविट दाखिल क्यों नहीं किया। इसके साथ ही अदालत ने पेगासस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर नहीं कर सकते एफिडेविट दाखिल : सरकार 

सरकार ने अदालत के सवालों पर कहा कि हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के कारणों से हम इस पर एफिडेविट दाखिल नहीं कर सकते हैं। सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘इस मामले पर कोई बात एफिडेविट के जरिए नहीं कही जा सकती। एफिडेविट दाखिल करना और फिर उसे सार्वजनिक किया जाना संभव नहीं है।

उन्होंने साफ कहा कि हम आतंकियों को यह जानने का मौका नहीं दे सकते हैं कि हम किस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। इस पर अदालत ने सरकार से असहमति जताते हुए कहा कि हम राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्क को समझते हैं और हमने यह भी कहा कि सरकार को इस पर कुछ बताने की जरूरत नहीं है।

फोन टैपिंग के आरोप लगाए जा रहे हैं क्या वह बात सही है या फिर गलत?

लेकिन यहां हमने इस पर जवाब मांगा है कि निजी तौर पर जिन लोगों के फोन टैपिंग के आरोप लगाए जा रहे हैं क्या वह बात सही है या फिर गलत। केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस सूर्यकांत ने सरकार से सवाल किया, ‘पिछली बार भी आपने राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क उठाया था और हमने कहा था कि इस मामले में कोई भी किसी भी तरीके से दखल नहीं दे सकता। हम आपसे व्यक्तिगत तौर पर लोगों के फोन हैक किए जाने को लेकर जवाब मांग रहे हैं।’

जस्टिस कांत ने सरकार के जवाब पर ऐतराज जताते हुए कहा, ‘हमें सिर्फ कुछ लोगों के व्यक्तिगत मोबाइल फोन्स को हैक किए जाने की चिंता है। आखिर किस एजेंसी के पास ऐसी क्षमता है और उसे ऐसा अधिकार दिया गया था या नहीं। कई लोगों का कहना है कि इसके जरिए उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है।’ इस पर जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यदि कुछ लोग कह रहे हैं कि उनकी निजता का हनन हुआ है तो यह गंभीर मसला है और हम इसकी जांच के लिए तैयार हैं। हम इस मसले की जांच के लिए एक्सपर्ट्स की एक कमिटी का गठन करेंगे।

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