Supreme Court orders immediate FIR for every missing person regardless of age or gender
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी भी व्यक्ति के लापता होने पर तुरंत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है।

Supreme Court Missing Person FIR Order: सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि किसी भी उम्र या लिंग का व्यक्ति लापता होने पर तुरंत FIR दर्ज की जाए। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने साफ किया कि 22 मई का पिछला आदेश केवल लापता बच्चों तक सीमित नहीं था।

कोर्ट ने राज्यों की इस व्याख्या पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि आदेश का पालन नहीं करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव और डीजीपी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

लापता व्यक्ति का मतलब हर व्यक्ति

5 अगस्त के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे यह जानकर हैरानी हुई कि कुछ राज्यों को लगा कि आदेश में इस्तेमाल किया गया व्यक्ति शब्द केवल बच्चों के लिए है। कोर्ट ने इस व्याख्या को जानबूझकर और गलत नीयत से तैयार किया गया बहाना बताया। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसके पिछले आदेश की भाषा पूरी तरह साफ थी। व्यक्ति का मतलब हर व्यक्ति है, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो।

आदेश नहीं माना तो मुख्य सचिव और DGP होंगे तलब

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश 22 मई के आदेश का पूरी तरह और उसकी मूल भावना के अनुसार पालन करने में नाकाम पाया जाता है, तो संबंधित मुख्य सचिव और डीजीपी को अवमानना का नोटिस जारी किया जाए। ऐसे अधिकारियों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। साथ ही उन्हें कारण बताओ हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि आदेश की कथित जानबूझकर अनदेखी के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

22 मई के आदेश में क्या कहा गया था?

सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि पुलिस को किसी भी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही FIR दर्ज करनी होगी। इसके लिए शुरुआती जांच का इंतजार नहीं किया जा सकता। परिवार को पहले खुद लापता व्यक्ति की तलाश करने के लिए कहना भी उचित नहीं होगा। FIR में व्यक्ति या बच्चे के अपहरण अथवा तस्करी से संबंधित भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों को भी शामिल करने का निर्देश दिया गया था।

लापता होने के शुरुआती घंटे बेहद अहम

सुप्रीम कोर्ट ने लापता व्यक्ति की तलाश में शुरुआती घंटों को बेहद महत्वपूर्ण माना था। कोर्ट के मुताबिक ये गोल्डन आवर्स होते हैं और इस दौरान लापता व्यक्ति के सुरक्षित मिलने की संभावना अधिक होती है। इसी वजह से पुलिस को लापता व्यक्ति की तलाश शुरू करने के लिए 24 घंटे इंतजार नहीं करना होगा। यदि 24 घंटे के भीतर व्यक्ति मिल भी जाता है और परिवार के पास लौट जाता है, तब भी पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

मानव तस्करी के मामलों में भी सख्त निर्देश

अगर पुलिस के पास यह मानने का ठोस आधार है कि किसी लापता व्यक्ति के मामले में मानव तस्करी शामिल हो सकती है, तो उसे चार महीने की अवधि पूरी होने का इंतजार नहीं करना होगा। ऐसे मामलों को विशेष यूनिट को सौंपने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स को चार सप्ताह के भीतर पूरी तरह सक्रिय करने का भी निर्देश दिया था।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।