कॉर्नर शॉट वेपन सिस्टम से छिपे हुए आतंकी पल भर में होंगे ढेर

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के घुसपैठ को रोकने एवं वहां के आतंकवादी गतिविधियों को ख़त्म करने के उद्देश्य से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की ओर कॉर्नर शॉट वैपन सिस्टम विकसित की गई है। यह एक आधुनिक हथियार है, जो जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को आतंकियों का मुकाबला करने के लिए दिया गया है। इस हथियार का खास डिजाइन अर्ममैंट रिसर्च एंड डिवैल्पमैंट एस्टैब्लिशमैंट पुणे ने तैयार किया है। यह सिस्टम एक तरफ झुक जाता है और इसका वीडियो जवान को आतंकवादियों की पूरी गतिविधि को दिखाता है । वह दुश्मन को चौंकाते हुए किसी भी दीवार के किनारे से कॉर्नर अटैक कर सकता है। इसे शहरी इलाके खासकर मकानों के आसपास की स्थिति के लिए डिजाइन किया गया है।

इस हथियार के विकास पर करीब एक दशक पहले काम शुरू हुआ था। मार्च 2019 में यह बनकर तैयार हुआ। शुरूआती परिक्षण के बाद सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इसकी खरीदी की। जुलाई 2020 में डीआरडीओ ने इस तकनीक को भारत इलैक्ट्रॉनिक लिमिटेड पुणे, और जेन टैक्नोलॉजी लि. हैदराबाद को उत्पादन के लिए हस्तांतरित कर दिया।

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रक्षा मंत्रालय के मुताबिक कॉर्नर शॉट वैपन सिस्टम एल्यूमीनियम अयस्क से बना है, इसलिए काफी हल्का और टिकाऊ है। इसके अगले हिस्से में वैपन, कैमरा, लेजर, इन्फ्रारैड इलुमिनेटर तथा टॉर्च है। पिछले हिस्से में डिस्प्ले स्क्रीन, इलैक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और इसे घुमाने तथा चलाने का तंत्र है। कलर डिस्प्ले, डिजिटल जूम, होट की और हाईपावर बैटरी की वजह से यह आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए काफी उपयोगी हथियार है। यह दिन और रात दोनों में कारगर है।

20वीं सदी की जंगों के बीच इस तरह के हथियारों की जरूरत लगातार महसूस हो रही थी जो दुश्मन को चकमा दें और उन्हें किसी और कोण से बैठकर चलाया जाए ताकि इनके पीछे मौजूद जवान सुरक्षित रहें। इसके लिए कई प्रयास हुए।

पहले विश्वयुद्ध के समय आस्ट्रेलिया सैनिक लांस कारपोरल विलियम बीच को इस राइफल का विचार तब आया जब उसके कई साथी सिर में गोली लगने से मारे गए। तब उसने अपनी ली एनफील्ड 303 की राइफल नाल को बीच से काटकर झुका दिया और एक शीशे से पैरीस्कोप बनाया, जो खंदक में उसे दुश्मन की मौजूदगी दिखाता था।

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इसकी खोज जर्मनी में हुई और क्रुम्मलौफ का अर्थ है मुड़ी हुई बैरल। इसे 44 असाल्ट राइफल में सुधार कर बनाया गया था। इसराईल ने वर्ष 2000 में इसे तैयार किया। इसको इसराईली सेना के एक सेवानिवृत्त लैफ्टिनैंट कर्नल अमोस ग्लोन ने तैयार किया था।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।