टीआरपी डेस्क। ईरान के साथ बढ़ते वैश्विक तनाव और युद्ध की आहट के बीच ट्रंप प्रशासन ने भारत को अगले 30 दिनों तक रूस से कच्चा तेल (Russian Oil) खरीदने की विशेष छूट दी है। इस फैसले के बाद भारत की आंतरिक राजनीति में भूचाल आ गया है, जहाँ कांग्रेस ने इस इजाजत शब्द पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी विदेश नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

क्या है अमेरिका का फैसला जिस पर हो रहा बवाल?

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एनर्जी एजेंडा के तहत भारत को यह अस्थायी राहत दी गई है। बेसेंट के मुताबिक, ईरान वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसे विफल करने और ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई स्थिर रखने के लिए भारत को यह 30 दिनों की छूट दी जा रही है।

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हालांकि, इस फैसले में जिस भाषा का इस्तेमाल हुआ है, उसने विपक्षी दलों को हमलावर होने का मौका दे दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि भारत जैसे संप्रभु राष्ट्र को किसी दूसरे देश से परमिशन लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

कांग्रेस का तीखा हमला: यह संप्रभुता का अपमान है

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोर्चा खोलते हुए इसे देश के आत्मसम्मान से जोड़ दिया। उन्होंने लिखा, अमेरिकी फाइनेंस मिनिस्टर कह रहे हैं कि उन्होंने भारत को 30 दिन की इजाजत दी है। यह हमारी आज़ादी और संप्रभुता पर करारा तमाचा है। अमेरिका कौन होता है हमें इजाज़त देने वाला? उन्होंने आगे जोड़ा कि राहुल गांधी लगातार देश की एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर सरकार को आगाह कर रहे हैं, लेकिन सरकार विदेशी दबाव के आगे झुक रही है।

वहीं, प्रियांक खड़गे ने भी बेहद सख्त लहजे में सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि US ट्रेजरी सेक्रेटरी की हैसियत क्या है जो वह भारत को निर्देश दे? खड़गे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार की विदेश नीति एक मजाक बनकर रह गई है और सरकार को अमेरिका के सामने थोड़ी हिम्मत दिखानी चाहिए।

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विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही भारत ने पश्चिम के दबाव के बावजूद रूस से तेल खरीदना जारी रखा था। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिका अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। अमेरिका का यह कहना कि वह भारत को छूट दे रहा है, यह संकेत देता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी ‘बॉस’ वाली छवि को फिर से स्थापित करना चाहता है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपने पुराने मित्र रूस और रणनीतिक साझेदार अमेरिका के बीच संतुलन कैसे बनाए रखे। हालांकि इस पूरे मामले में विदेश मंत्रालय (MEA) का कोई बयान नहीं आया है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।