UPI Payment Charge Rule: Upi के जरिए अब दो हजार रुपए से अधिक के लेनदेन पर अतिरिक्त्त चार्ज देना होगा। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि UPI से ₹2,000 तक का पेमेंट करने पर ग्राहकों से किसी तरह की फीस नहीं ली जाएगी और बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर इस पर कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज नहीं लगा सकेंगे। RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान भी इस छूट के दायरे में रहेंगे। वहीं, अभी 2000 हजार से अधिक के लेनदेन पर लगने वाला कोई टैक्स तय नहीं किया गया है।
दरअसल, अगस्त में संसद से टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पास होने के बाद से यह चर्चा शुरू हुई थी कि ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाया जा सकता है, जिससे कारोबारियों और ग्राहकों पर लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी।
क्या ₹2,000 UPI पेमेंट की नई लिमिट है?
वित्त मंत्रालय की स्पष्ट स्थिति के मुताबिक ₹2,000 कोई नई पेमेंट लिमिट नहीं है। ग्राहक UPI के जरिए इससे अधिक रकम आसानी से भेज सकते हैं। यह सीमा केवल फीस से जुड़ी हुई है, जिसके तहत ₹2,000 तक के लेनदेन पूरी तरह निशुल्क रखे गए हैं। अगर भविष्य में इससे ऊपर कोई शुल्क लगाना होगा, तो सरकार को इसके लिए अलग से नियम बनाने होंगे। फिलहाल ₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 जैसे बड़े भुगतान करने पर अपने आप कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं कटेगा।
भारत में UPI का नेटवर्क कितना बड़ा?
जुलाई 2026 तक 741 बैंक UPI से जुड़े थे। सिर्फ जुलाई में करीब 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल रकम करीब ₹29.88 लाख करोड़ रही। वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी करीब 84% रही। यानी छोटे दुकानों से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े पेमेंट तक, UPI रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट का सबसे अहम जरिया बन चुका है।
इतनी चर्चा क्यों और किसे देना पड़ सकता है शुल्क?
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दुकानदारों को UPI के जरिए कुल ₹198 लाख करोड़ के पेमेंट मिले थे। इनमें ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन भले ही सिर्फ 4% थे, लेकिन उनकी कुल वैल्यू ₹131 लाख करोड़ यानी कुल पेमेंट का 66% थी। यही वजह है कि बड़े कारोबारी भुगतानों को लेकर MDR की चर्चा तेज हुई है। हालांकि, दोस्त या परिवार के सदस्यों को किए जाने वाले P2P (पर्सन-टू-पर्सन) पेमेंट पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यदि भविष्य में MDR लागू होता भी है, तो यह केवल चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर और बहुत मामूली दर पर होगा, जिससे छोटे दुकानदार बाहर रह सकते हैं।
राजनीतिक बयानबाजी और UPI का विशाल नेटवर्क
इस पूरे मामले पर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है और दुकानदार पर लगने वाला बोझ अंततः ग्राहक की जेब पर ही पड़ेगा। इसके जवाब में भाजपा ने कांग्रेस के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे झूठा करार दिया है। भारत में UPI का दायरा लगातार बढ़ रहा है और जुलाई 2026 तक देश में 741 बैंक इससे जुड़ चुके हैं। अकेले जुलाई महीने में करीब 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल राशि ₹29.88 लाख करोड़ दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी 84% तक पहुंच चुकी है।



