Friday, October 22, 2021
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अब आंखें बताएंगी दिल की धड़कनों का हाल, इनमें छिपा है सेहत का राज

न्यूयॉर्क। कहते हैं आंखें आत्मा की खिड़की होती हैं, लेकिन एक नए शोध से पता चलता है कि आंखें दिल की

भी खिड़की होती हैं। हालिया शोध के अनुसार, आंखों से भी दिल की बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।

 

डॉक्टर दिल की बीमारियों के जोखिम की पहचान करने के लिए कई कारकों जैसे उम्र, धूम्रपान करने के

इतिहास और उच्च रक्तचाप पर ध्यान देते हैं।

 

लेकिन, आंखों के पीछे मौजूद रक्त की वाहिकाओं में होने वाले बदलाव से दिल के स्वास्थ्य के बारे में

सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

आंखों के बदलाव और रक्तचाप में सीधा संबंध

पूर्व के शोधों में आंखों में होने वाले बदलाव और उच्च रक्तचाप के बीच सीधा संबंध है। स्विट्जरलैंड की

यूनिवर्सिटी ऑफ बासेल के प्रोफेसर डॉक्टर हेनर हानसेन ने कहा, हमारे पास जो डाटा है उससे स्पष्ट

होता है कि बहुत कम उम्र के बच्चे (छह से आठ साल) जो स्वस्थ हैं उनमें भी उच्च रक्तचाप की वजह

से संवहनी में परिवर्तन आ सकता है।

 

आंखों में होने वाले परिवर्तन और दिल संबंधी बीमारियों के बीच में संबंध को जांचने के लिए यह अब

तक का सबसे बड़ा शोध है। शोध को अमेरिकन हार्ट एसोसिएशंस हाइपरटेंशन जर्नल में प्रकाशित

किया गया है।

 

इस शोध में पता चला है कि आंखों के पीछे मौजूद छोटी रक्त वाहिकाओं में तब परिवर्तन देखने को

मिलता है जब दिल की धमनियों में सिकुड़न होती है या रक्तचाप में बढ़ोतरी होती है।

 

दृष्टि प्रभावित नहीं होती

शोधकर्ता प्रो. रूडनिका ने कहा, रेटिना में होने वाले इन बदलावों से व्यक्ति की दृष्टि प्रभावित नहीं

होती, लेकिन यह दिल की बीमारियों की सटीकता से पहचान कर सकता है।

 

टीम अब यह अध्ययन करने में जुटी है कि क्या आंखों में होने वाले इन्हीं बदलावों से किसी व्यक्ति

में एक दशक बाद भी दिल की बीमारियों के जोखिम के बारे में पता लगाया जा सकता है।

 

रेटिनल मोर्फोलॉजी से लगा सकते हैं पता

लंदन की सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता अलेसिया रूडनिका ने कहा, अगर शरीर में जो

कुछ भी हो रहा है उसकी वजह से आंखों के पीछे भी परिवर्तन होता है, तो हम आंखों से बहुत कुछ

पता लगा सकते हैं। रेटिनल मोर्फोलॉजी को सिर्फ एक शोध उपकरण बनाने की जगह क्लीनिक

अभ्यास में भी लाने की जरूरत है।

 

इस शोध में यूके बायोबैंक से 55,000 वयस्कों के डाटा पर अध्ययन किया गया। एक ऑटोमेटेड

प्रोग्राम ने हर प्रतिभागी की आंखों के पीछे की रक्त वाहिकाओं की डिजिटल तस्वीर की जांच की।

 

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