Again Rhetoric On Reservation Issue In Chhattisgarh- कपिल सिब्बल बोले राज्यपाल अनुमति दें, या फिर राष्ट्रपति को रेफर करें

टीआरपी डेस्क

आरक्षण मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल बिलासपुर हाई कोर्ट पहुंचे। हाई कोर्ट में इस याचिका पर आज सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने राजभवन सचिवालय को नोटिस जारी किया है। कोर्ट में सुनवाई के बाद कपिल सिब्बल ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि आरक्षण बिल पास हुआ था, उस पर राज्यपाल ने अबतक उस पर कोई कदम नहीं उठाया। संविधान के मुताबिक या तो उसपर राज्यपाल अपनी अनुमति दें, या न दे, या फिर राष्ट्रपति जी को रेफर करें। वहीँ, मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा, राजभवन को हाईकोर्ट से नोटिस जारी हुआ है। इससे उम्मीद है कि राज्यपाल विधेयक पर हस्ताक्षर करेगी।

सोमवार को इन दोनों याचिकाओं पर हाईकोर्ट में प्रारंभिक सुनवाई हुई। शासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट व पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने तर्क देते हुए कहा कि विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद राज्यपाल सिर्फ सहमति या असमति दे सकते हैं। लेकिन, बिना किसी वजह के बिल को इस तरह से लंबे समय तक रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्यपाल अपने संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग कर रही है। उनके साथ प्रदेश के महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा भी थे। इस केस में हिमांक सलूजा की तरफ से हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट डॉ. निर्मल शुक्ला और शैलेंद्र शुक्ला ने तर्क दिया।

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कपिल सिब्बल की टिपण्णी पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हाइकोर्ट के फैसले के आधार पर ही तो आरक्षण रुका है। 56 प्रतिशत आरक्षण पर हाइकोर्ट ने रोक लगाया है तो फिर 82 प्रतिशत कैसे वैलिड होगा, सवाल इसी में था। 56 प्रतिशत आरक्षण निरस्त करने वाला हाइकोर्ट ही।

सिब्बल का कहना है कि हमारे हिसाब से उनको कोई देर नहीं करनी चाहिए। छत्तीसगढ़ की जनता और खास करके ट्रायबल के लिए ये बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट ने तो केवल नोटिस भेजा है। हमने सिर्फ यही कहा हैं कि संविधान के तहत या तो उनको अनुमति देनी चाहिए या फिर राष्ट्रपति को रेफर करना चाहिए। इसी के अंर्तगत कोर्ट ने नोटिस दिया है।

छत्तीसगढ़ से पहले तमिलानाडू, गोवा, केरल में राज्यपालों के खिलाफ याचिका दायर हुई और नोटिस के बाद हाई कोर्ट ने उसे खारिज कर दी। जानकारों का कहना है कि सीटिंग राज्यपाल के खिलाफ हाई कोर्ट में मामला नहीं चल सकता। क्योंकि, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को राज्यपाल शपथ दिलाते हैं। वैसे भी राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। प्रोटोकॉल में सबसे उपर हैं।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।