CG Politics: छत्तीसगढ़ में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। कांग्रेस पार्टी ने राज्य की भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन’ को महज एक राजनीतिक नौटंकी और दिखावा करार दिया है।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया है कि यह हेल्पलाइन जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय केवल आंकड़ों की खानापूर्ति करने तक सीमित होकर रह गई है।
केवल विभागों में फाइलें रेफर करने का खेल
कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में बैठने वाले कर्मचारी जनता की शिकायतों को केवल संबंधित विभागों में फॉरवर्ड या रेफर कर देते हैं और इसी को समाधान बताकर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। जमीनी स्तर पर आम नागरिकों की वास्तविक परेशानियों का कोई हल नहीं निकल रहा है। सरकार सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और केवल प्रचार पाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है, जबकि जनता रोजमर्रा की बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है।
मुख्यमंत्री जनदर्शन पर भी उठाए गंभीर सवाल
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख ने सरकार के अन्य वादों और कार्यक्रमों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निवास में हर गुरुवार को जनता से मिलने का जो कार्यक्रम शुरू किया गया था, वह भी कागजी साबित हुआ और ढाई साल में आधे दर्जन गुरुवार को भी मुख्यमंत्री ने लोगों से मुलाकात नहीं की। इसके अलावा, कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में मंत्रियों के नियमित बैठने की घोषणा की गई थी, वह व्यवस्था भी अब पूरी तरह से बंद हो चुकी है।
2 लाख से अधिक शिकायतों का दावा, जमीनी हकीकत कुछ और
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार 9 जून से 15 अक्टूबर 2026 के बीच हेल्पलाइन 1076 पर 2,31,850 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 2,05,996 शिकायतों के निराकरण का दावा किया गया जबकि 25,854 शिकायतें लंबित बताई गईं। सरकार ने निराकरण की दर 88.85 प्रतिशत बताई है, लेकिन कांग्रेस ने इन दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगाए हैं।
जमीन पर समाधान होने में बड़ा अंतर
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि किसी शिकायत का ऑनलाइन पोर्टल पर बंद हो जाना और समस्या का जमीन पर वास्तविक हल निकल जाना, ये दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं। सरकार को पारदर्शी रुख अपनाते हुए विभागवार और जिलावार आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि जनता यह देख सके कि किस विभाग में कितनी शिकायतें आईं, कितनी लंबित हैं और धरातल पर समाधान की असल स्थिति क्या है।
दफ्तरों से ‘सिटीजन चार्टर’ के बोर्ड गायब
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकारी दफ्तरों में काम तय समय सीमा में हो, इसके लिए ‘सिटीजन चार्टर’ बनाया गया था जो आज भी लागू है। लेकिन भाजपा सरकार के आने के बाद प्रदेश के सरकारी कार्यालयों से सिटीजन चार्टर के बोर्ड तक हटा दिए गए हैं। आज स्थिति यह है कि किसी भी दफ्तर में नागरिकों के काम समय पर नहीं हो रहे हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
राशन, पेंशन, बिजली के लिए भटक रही जनता
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में राशन, पेंशन, बिजली, पेयजल, आवास, राजस्व और अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के नाम पर आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी व्यक्ति को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक जवाबदेही की विफलता को दर्शाता है।
मंत्रियों के विभागों पर भी कसा तंज
कांग्रेस ने सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में सरकार और उसकी योजनाएं केवल विज्ञापनों में ही दिखाई देती हैं, धरातल पर न सरकार दिखती है और न ही योजनाएं असरदार साबित हो रही हैं। गृह मंत्री को कानून-व्यवस्था की सही जानकारी नहीं है, कृषि मंत्री को खाद की स्थिति नहीं पता और शिक्षा मंत्री स्कूलों की सुध नहीं ले रहे हैं। कुल मिलाकर यह सरकार पूरी तरह से ‘राम भरोसे’ चल रही है।



