Caste Census India: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता नाना भाऊ पटोले ने केंद्र सरकार की जातिगत जनगणना नीति पर जोरदार हमला बोला है।
रायपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की मौजूदगी में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना का मौजूदा प्रारूप पूरी तरह दोषपूर्ण है। इससे स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार की नीयत पिछड़े और शोषित वर्गों को उनका हक देने की नहीं है।
मौजूदा प्रश्नावली को रद्द करने और ड्रॉपडाउन सूची लागू करने की मांग
कांग्रेस ने मौजूदा जनगणना प्रश्नावली को तुरंत रद्द करने की मांग उठाई है। नाना पटोले ने कहा कि तेलंगाना और बिहार की तर्ज पर प्रमाणित जातियों की ‘ड्रॉपडाउन सूची’ तैयार कर पारदर्शी तरीके से राष्ट्रव्यापी जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नई प्रश्नावली तैयार करने से पहले सभी राजनीतिक दलों, भाषाविदों और विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना बेहद आवश्यक है, ताकि प्रत्येक समुदाय के सटीक आंकड़े सामने आ सकें।
सॉल नंबर 10 पर विवाद: ‘ओपन-एंडेड सवाल से बढ़ेंगी विसंगतियां’
कांग्रेस नेता ने अधिसूचित 40 सवालों में से प्रश्न संख्या 10 का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने इसमें ओपन-एंडेड (खुला) विकल्प रखा है, जो सबसे बड़ी गड़बड़ी है। ओपन-एंडेड प्रक्रिया में गणनाकार नागरिक द्वारा बताई गई जाति को बिना किसी पूर्व निर्धारित सूची के हूबहू लिख लेता है। भारत में एक ही जाति क्षेत्रीय बोलियों, उपजातियों और अलग-अलग स्पेलिंग के कारण भिन्न-भिन्न नामों से जानी जाती है। ऐसे में ड्रॉपडाउन सूची न होने से देश भर में लाखों नाम दर्ज हो जाएंगे, जिससे डेटा पूरी तरह अनुपयोगी और अव्यवहारिक हो जाएगा।
ओबीसी और अति पिछड़े वर्गों (EBC) को उठाना पड़ेगा सबसे बड़ा नुकसान
नाना पटोले ने चेतावनी दी कि गलत आंकड़ों का सबसे बड़ा खामियाजा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और वंचित समुदायों को भुगतना पड़ेगा। जब एक ही जाति स्पेलिंग और नाम के अंतर से कई टुकड़ों में बंट जाएगी, तो उनकी वास्तविक आबादी और वंचना दोनों अदृश्य हो जाएंगी। इससे “जितनी आबादी, उतना हक” के सिद्धांत और आरक्षण की न्यायसंगत समीक्षा को करारा झटका लगेगा, जिससे छात्रवृत्ति, सरकारी नौकरियों और कल्याणकारी योजनाओं में पिछड़ों की हिस्सेदारी कमजोर होगी।
पुराने हलफनामे का हवाला और सरकार से सुधार की अपील
कांग्रेस ने याद दिलाया कि 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दायर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के हलफनामे में खुद केंद्र सरकार ने माना था कि जातिगत जनगणना के लिए ड्रॉपडाउन सूची जरूरी है। लेकिन अब सरकार इससे पीछे हट रही है। पटोले ने कहा कि अभी जनगणना प्रक्रिया शुरुआती चरण में है, इसलिए मोदी सरकार के पास इसमें सुधार करने का मौका है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्रों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पिछड़ों और दलितों के हक के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई जारी रखेगी।
FAQ
प्रश्न 1: कांग्रेस नेता नाना पटोले ने जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर क्या मुख्य आपत्ति जताई है?
उत्तर: उन्होंने आपत्ति जताई है कि प्रश्नावली में ड्रॉपडाउन सूची के बजाय ‘ओपन-एंडेड’ सवाल रखे गए हैं, जिससे जातियों के लाखों अलग-अलग नाम दर्ज हो जाएंगे और सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाएगा।
प्रश्न 2: कांग्रेस पार्टी जातिगत जनगणना के लिए किस मॉडल को अपनाने की मांग कर रही है?
उत्तर: कांग्रेस बिहार और तेलंगाना की तर्ज पर पूर्व-प्रमाणित जातियों की ‘ड्रॉपडाउन सूची’ के आधार पर पारदर्शी तरीके से जनगणना कराने की मांग कर रही है।
प्रश्न 3: ओपन-एंडेड सवाल से ओबीसी और ईबीसी वर्गों को क्या नुकसान हो सकता है?
उत्तर: नाम और स्पेलिंग के अंतर से एक ही जाति कई हिस्सों में बंट जाएगी, जिससे उनकी वास्तविक जनसंख्या अदृश्य हो जाएगी और उन्हें आरक्षण व सरकारी योजनाओं का सही लाभ नहीं मिल पाएगा।
प्रश्न 4: क्या केंद्र सरकार ने पहले कभी ड्रॉपडाउन सूची की आवश्यकता स्वीकार की थी?
उत्तर: हां, 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने माना था कि सटीक जातिगत जनगणना के लिए ड्रॉपडाउन सूची का होना आवश्यक है।
प्रश्न 5: इस मुद्दे पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का क्या रुख रहा है?
उत्तर: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे लगातार इसकी मांग कर रहे हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर त्रुटिहीन जाति जनगणना कराने का आग्रह किया है।


