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मनुस्मृति विवाद पर भड़की भाजपा, राहुल गांधी के बयान पर सांसद संतोष पांडेय ने किया पलटवार

मनुस्मृति विवाद पर भड़की भाजपा, राहुल गांधी के बयान पर सांसद संतोष पांडेय ने किया पलटवार
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

CG Political News: लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मनुस्मृति में महिलाओं को अधीन बताए जाने के बयान से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के इस बयान की आलोचना की है। वहीं, छग के सांसद संतोष पांडेय ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कई राज्यों में महिलाएं मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, ऐसे में महिलाओं को पराधीन कहना पूरी तरह गलत है। दरअसल, राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में मनुस्मृति का ज़िक्र किया। जिसमें उन्होंने मनुस्मृति में महिलाओं के बारे में लिखे गए एक उद्धरण को शर्मनाक बताया।

राहुल गांधी ने मनुस्मृति को कोट करते हुए कहा कि बचपन में महिला को अपने पिता के अधीन होना चाहिए, युवावस्था में अपने पति के अधीन होना चाहिए और जब पति नहीं रहे तब, अपने बेटों के अधीन रहना चाहिए। एक महिला कभी भी आज़ाद नहीं हो सकती है।"उन्होंने दावा किया, "ये बात सीधे मनुस्मृति में लिखी गई है। इन शब्दों पर शर्म आनी चाहिए, ये शब्द कभी भी नहीं कहे जाने चाहिए थे। महिलाएं प्रोफ़ेशनल, खिलाड़ी, लीडर, क्रिएटर, आंतरप्रेन्योर और भी बहुत कुछ हैं। फिर भी पुरुष उन्हें ये तीन पहचान ही देते हैं। राहुल गांधी के इस बयान की बीजेपी की ओर से जमकर आलोचना की जा रही है और साथ ही दिल्ली, कश्मीर से लेकर गोवा सहित कई राज्यों में महिलाओं के सीएम होने का दावा किया गया और महिलाओं के लिए दिए गए इस बयान पर माफी मांगने की भी मांग की है।

जानिए, आखिर मनुस्मृति में क्या है?
दरअसल, मनुस्मृति के पांचवें अध्याय के 148वें श्लोक में महिलाओं के संरक्षण और स्वतंत्रता को लेकर एक श्लोक मिलता है। इसमें लिखा है, "एक लड़की हमेशा अपने पिता के संरक्षण में रहनी चाहिए, शादी के बाद पति उसका संरक्षक होना चाहिए, पति की मौत के बाद उसे अपने बच्चों की दया पर निर्भर रहना चाहिए, किसी भी स्थिति में एक महिला आज़ाद नहीं हो सकती।"

ईसा के जन्म से दो-तीन सौ साल पहले रचना
मनुस्मृति के फ़ॉर्मेट को समझाते हुए इतिहासकार नराहर कुरुंदकर कहते हैं, इस किताब की रचना ईसा के जन्म से दो-तीन सौ सालों पहले शुरू हुई थी। पहले अध्याय में प्रकृति के निर्माण, चार युगों, चार वर्णों, उनके पेशों, ब्राह्मणों की महानता जैसे विषय शामिल हैं। दूसरा अध्याय ब्रह्मचर्य और अपने मालिक की सेवा पर आधारित है। तीसरे अध्याय में शादियों की किस्मों, विवाहों के रीति रिवाजों और श्राद्ध यानी पूर्वज़ों को याद करने का वर्णन है। चौथे अध्याय में गृहस्थ धर्म के कर्तव्य, खाने या न खाने के नियमों और 21 तरह के नरकों का ज़िक्र है। पांचवें अध्याय में महिलाओं के कर्तव्यों, शुद्धता और अशुद्धता आदि का ज़िक्र है। छठे अध्याय में एक संत और सातवें अध्याय में एक राजा के कर्तव्यों का ज़िक्र है। आठवां अध्याय अपराध, न्याय, वचन और राजनीतिक मामलों आदि पर बात करता है। नौवें अध्याय में पैतृक संपत्ति, दसवें अध्याय में वर्णों के मिश्रण, ग्यारहवें अध्याय में पापकर्म और बारहवें अध्याय में तीन गुणों व वेदों की प्रशंसा है। मनुस्मृति की यही सामान्य रूपरेखा है। मनुस्मृति में अधिकार, अपराध, बयान और न्याय के बारे में बात की गई है। ये वर्तमान समय की आईपीसी और सीआरपीसी की तरह लिखी गई है।

बाबा साहब ने जलाई थी मनुस्मृति
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने 25 जुलाई, 1927 को महाराष्ट्र के कोलाबा ज़िले में (वर्तमान में रायगड़) के महाद में सार्वजनिक रूप से मनुस्मृति को जलाया था। आंबेडकर अपनी किताब 'फ़िलॉसफ़ी ऑफ़ हिंदूइज़्म' में लिखते हैं, मनु ने चार वर्ण व्यवस्था की वकालत की थी। वो कहते हैं, मनु ने इन चार वर्णों को अलग-अलग रखने के बारे में बताकर जाति व्यवस्था की नींव रखी। हालांकि, ये नहीं कहा जा सकता है कि मनु ने जाति व्यवस्था की रचना की है। लेकिन उन्होंने इस व्यवस्था के बीज ज़रूर बोए थे।

कार्यक्रम में उमड़ी थी जमकर भीड़
छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भारी भीड़ देखने को मिली। इसे लेकर कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में इसे भुनाने का भरसक प्रयास किया है। कांग्रेस ने GEN-Z को साधने के लिए इस कार्यक्रम की शुरूआत की है, जिसका काफी अच्छा प्रतिसाद बताया जा रहा है। इसे भाजपा ने सिरे से नकारा है और कहा है कि कांग्रेस कॉकरोच जनता पार्टी के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने की सोच रही है। वहीं, कांग्रेस देशभर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम का आयोजन कर रही है, जिसका आयोजन जल्दी ही छग में देखने को मिलेगा।

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