राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस अब भी वंदेमातरम के नए स्वरूप को स्वीकर करने को तैयार नहीं है। बुधवार को नई दिल्ली के इंदिरा भवन में आयोजित की गई कांग्रेस की वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई। जिसके बाद कांग्रेस ने वंदेमातरम के सिर्फ दो ही अंतरे गाने का निर्णय लिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी 1937 में हुई कांग्रेस बैठक में लिए गए फैसले का पालन करेगी। वहीं, दूसरी ओर भाजपा का दावा है कि स्वतंत्रता दिवस के दिन कांग्रेस मुख्यालय में वंदेमातरम गीत बीच में ही रोका गया था।
भाजपा का आरोप है कि गीत के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष ने गीत रुकवाने की कोशिश की थी। जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के अपमान का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वंदेमातरम के दो टुकड़े किए। साथ ही संसद से पास कानून को भी कांग्रेस ने सिरे से नकारा है।
76 साल बाद बना वंदेमातरम पर अधिनियम
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत घोषित किया। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’बनाया।
जानिए, क्या है अधिनियम में प्रावधान
- गायन को जानबूझकर रोकना दंडनीय अपराध
- बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान भी दंडनीय
- अपराध पर 3 साल तक की जेल या जुर्माने की सजाय
- सजा और जुर्माना दोनों की हो सकती है सजा
सांसद निशिकांत दुबे का बड़ा आरोप
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाया है, उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी वंदे मातरम् गाते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए। 1937 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग मिलकर सरकार बनाना चाहते थे, लेकिन जिन्ना ने कहा था कि शर्त है कि वंदे मातरम् गाना बंद करना पड़ेगा। पंडित नेहरू ने मुस्लिम वोट के लिए एक कमेटी बनाई कि वंदे मातरम् गाना चाहिए या नहीं। इसके बाद नेहरू जी ने तय कि वंदे मातरम् मुसलमानों के धर्म के खिलाफ है इसलिए इसके केवल 2 स्टैंज़ा गाए जाएंगे। आज राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम आपके द्वारा बनाए हुए कानून को नहीं मानते हैं। जनता के सोचने और समझने की बात है कि कांग्रेस किस किस्म की राजनीति की तरफ बढ़ रही है। वहीं छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी कांग्रेस के इस फैसलें की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुस्लिम लीग के रास्ते पर चल रही है।
कांग्रेस बोली-देशद्रोही हमें सिखाएंगे
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, “आज़ादी की लड़ाई के समय RSS कहां थी? अब आप हमें ‘वंदे मातरम’ के बारे में बता रहे हैं। ऐसा कहकर वे रबींद्रनाथ टैगोर, सी. राजगोपालाचारी, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पंडित नेहरू के विचारों के ख़िलाफ़ जा रहे हैं। हमें हैरानी नहीं है क्योंकि उस समय भी RSS इन महान लोगों का विरोध करता था। गोडसे और सावरकर के परिवार वालों ने आज माना है कि गोडसे RSS का हिस्सा थे। यही वजह है कि वे (भाजपा) आज ‘वंदे मातरम’ और गांधी जी के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं। क्या ये देशद्रोही अब हमें ‘वंदे मातरम’ के बारे में सिखाएंगे?”
150वीं वर्षगांठ से शुरू हुआ विवाद
7 नवंबर को ‘वंदे मातरम’ की डेढ़ सौवीं वर्षगांठ के कार्यक्रम के बाद से इस पर विवाद शुरू हुआ। कार्यक्रमों की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस ने 1937 के फ़ैज़ाबाद अधिवेशन से पहले ‘वंदे मातरम के कुछ अहम हिस्सों को हटा दिया था।’तब कहा था, “1937 में वंदे मातरम के कुछ अहम पदों को, उसकी आत्मा के एक हिस्से को हटा दिया गया था। वंदे मातरम को तोड़ दिया गया था, कांग्रेस ने ये अन्याय क्यों किया.? इसी अन्याय ने ही विभाजन के बीज बोए।
भाजपा के आरोपों का कांग्रेस ने दिया जवाब
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने वंदे मातरम पर सब्यसाची भट्टाचार्य की लिखी एक किताब का ज़िक्र करते हुए एक्स पर पोस्ट किया था। “कांग्रेस वर्किंग कमेटी की 1937 में हुई बैठक से तीन दिन पहले ख़ुद गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने नेहरू जी को इस बारे में ख़त लिखा। “वंदे मातरम से वो ख़ुद जुड़े हुए थे और उन्होंने ही सुझाव दिया कि इस गीत के पहले दो स्टेंजा (हिस्सों) को अपनाना चाहिए, और बैठक में लिया गया फ़ैसला उन्हीं के ख़त से प्रभावित था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर पर विभाजनकारी विचारधारा रखने का आरोप लगा रहे हैं।”


